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22 अप्रैल, 2009

आग से निपटने के लिए स्वयं भी रहें मुस्तैद

आग लगने की घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल अग्निशमन विभाग पर आश्रित होने के बजाय स्वयं भी पूरी मुस्तैदी से तैयार रहें। गर्मी के मौसम में अगलगी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आयोजित कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था पर चौकस निगाहें रखने की जरूरत है। जिला अग्निशमन पदाधिकारी सिपाही सिंह ने कार्यक्रम आयोजकों को पंडालों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सलाह दी हैं। इसके लिये उन्होंने लोगों को अग्निशमन के प्रारंभिक उपकरणों को अपने स्तर पर लगाने, स्थायी पंडाल के कार्यक्रम स्थल पर कम से कम दो डीसीपी अग्निशामक यंत्र स्थापित करने, चार सौ लीटर पानी युक्त दो ड्रम, चार बाल्टी तथा छह मग की व्यवस्था करने, बालू की दो-चार बोरी, बिजली या जेनरेटर के तार पंडाल में दौड़ाने के पूर्व मुख्य स्वीच जरूर लगाने, पंडालों में वायरिंग के जोड़ सख्त करने, कायदे से टेपिंग करने, पंडालों में फायर स्टेशन के टेलीफोन नंबर अंकित करने की सलाह दी है। अग्निशमन पदाधिकारी का कहना है कि महत्वपूर्ण नेता या अधिकारियों के कार्यक्रम के दौरान अग्निशमन वाहन की तैनाती के समय अन्य जगहों पर आग लगने की सूचना मिलने पर असहज स्थिति पैदा होती है। उन्होंने लोगों को विभागीय आत्मनिर्भरता के अलावा स्वयं भी तैयारी रहने पर बल दिया।

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