ताजा समाचार

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

 

29 नवंबर, 2009

जेल जाने को तैयार हैं काष्ठ शिल्पी



नवगछिया : पूर्व की सरकार ने विश्र्वकर्मा काष्ठ शिल्पी समाज के समूल नष्ट को लेकर भारतीय वन अधिनियम 1927 के लिए संशोधित विधेयक 1990 में लाया, जिसकी वापसी की मांग को लेकर बिहार भर में 17 हजार लोग अब तक जेल जा चुके हैं जबकि हजारों लोग जेल जाने की लाइन में खड़े हैं। उक्त बातें विश्र्वकर्मा काष्ठ शिल्पी विकास समिति के प्रदेश सचिव राम भरोश शर्मा ने नवगछिया स्थित आनन्द विवाह भवन में रविवार को आयोजित एक सम्मेलन के दौरान कही। कहा कि बिहार वन क्षेत्र नहीं है। यहां बिहार वन उत्पाद नियमावली 1973 लागू नहीं है बावजूद इसे लागू कर टीपी के नाम पर लाखों की लूट खसोट की जा रही है। श्री शर्मा ने बताया कि पूरे बिहार में जिला सम्मेलन एवं प्रखंड सम्मेलनों का दौर चल रहा है। समिति का पांचवा राज्य महाधिवेशन भागलपुर जिले में होगा। कहा कि जदयू के घोषणा पत्र में सरकार बनने पर आरा मिल को वन विभाग से अलग करने की बात कही गई थी। पर यह पूरा नहीं हो सका। इस सम्मेलन को क्षेत्रीय विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल ने संबोधित करते हुए कहा कि संगठन की मजबूती के लिए संगठित रहना जरूरी है, तभी हर तरह का कल्याण संभव है। उन्होंने सबसे मिल जूल कर अपना काम निकालने की सलाह दी। वहीं बिहपुर के विधायक शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल ने कहा कि आप अपने को दबा-कुचला न समझें। पूरा सिस्टम आपके साथ है। हर क्षेत्र में अपने हक के लिए लड़ना होगा तभी सपना पूरा होगा। सम्मेलन का उद्घाटन प्रदेश सचिव राम भरोश शर्मा व विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। जिसकी अध्यक्षता उपेन्द्र प्रसाद शर्मा एवं मंच संचालन बिहपुर के सचिव प्रदीप कुमार ने किया। सच्चिदानंद शर्मा द्वारा आयोजित इस सम्मेलन को परमानन्द, नरसिंह शर्मा, भीम शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, सुनील शर्मा आदि लोगों ने भी संबोधित किया। सम्मेलन के अंतिम चरण में नवगछिया, रंगरा, गोपालपुर एवं इस्माईलपुर प्रखंड के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का भी चुनाव हुआ। इसके अलावा समिति के पांचवे राज्यस्तरीय अधिवेशन के विषय पर भी विचार विमर्श किया गया।

ध्यान दें

प्रकाशित समाचारों पर आप अपनी राय या टिपण्णी भी भेज सकते हैं , हर समाचार के नीचे टिपण्णी पर क्लिक कर के .

घूमता कैमरा

लोकप्रिय समाचार

इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.