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28 अक्तूबर, 2009

40 साल का हुआ इंटरनेट

एक दौर था जब इंटरनेट के बारे में लोगों को सुनकर आश्चर्य होता था। लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के साथ आज दुनिया का शायद ही कोई ऐसा कोना होगा जहां लोग इंटरनेट पर निर्भर न हों। सूचनाओं के आदान-प्रदान का यह सर्वोत्ताम माध्यम गुरुवार को 40 साल का हो गया। वक्त के साथ इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ। 1999 में पूरी दुनिया में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या जहां 25 करोड़ थी वहीं 2008 में यह आंकड़ा एक अरब 50 करोड़ जा पहुंचा।

इंटरनेट की लोकप्रियता के बारे में शायद इसके जन्मदाता क्लीनराक ने भी यह कल्पना नहीं की होगी कि आने वाला समय इस कदर इंटरनेट पर निर्भर होगा। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, ट्विटर व आरकुट जैसी लोकप्रिय साइट लोगों के लिए जुनून बन जाएगी। लेकिन इसकी व्यापकता का नकारात्मक उपयोग भी बढ़ा है। आतंकी गतिविधियों, राष्ट्र विरोधी रणनीति और अन्य गैर कानूनी कार्यो को अंजाम देने की एक लंबी फेहरिस्त है। इसमें धमकी भरे ईमेल, प्रोनोग्राफी, हैकिंग, फर्जी वेबसाइट आदि शामिल हैं। साइबर मामलों के जानकार सुरेश गोयल कहते हैं, सकारात्मक चीजों के साथ नकारात्मक चीजें भी आती हैं। इंटरनेट भी इससे अछूता नहीं है, पर प्रौद्योगिकी के विकास के अनुरूप निगरानी रखने वाला तंत्र विकसित नहीं हो सका है।'

जन्म की कहानी अजीब

इंटरनेट के जन्म की कहानी भी थोड़ी अजीब है। अमेरिका के लास एंजिलिस स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने दो सितंबर, 1969 को 15 फुट लंबे तार से दो कंप्यूटर को आपस में जोड़कर सूचना का आदान प्रदान किया। 29 अक्टूबर, 1969 को लेन क्लीनराक ने इस परीक्षणों के माध्यम से इंटरनेट का सूत्रपात्र किया। क्लीनराक ने इंटरनेट के माध्यम से मात्र एक ही शब्द क्रैश [कंप्यूटर ठप] लिखा था। इसके बाद 1971 में रेय टोम्लिसन ने पहला ई-मेल भेजा। जनवरी, 1985 में डाट काम, डाट नेट, डाट ओराजी जैसे डोमेन तकनीक का विकास हुआ।

दो नवंबर, 1988 को व्यापक तौर पर इंटरनेट का पहली बार इस्तेमाल हुआ। 1990 में टिन बर्नर्स ली ने व‌र्ल्ड वाइड वेब [डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू] ईजाद की। आज इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले देशों में श्रेणी में भारत चौथे नंबर पर जबकि चीन शीर्ष पर है।

कंप्यूटर पर कठिन शब्द का अर्थ ढूंढ़ना होगा आसान

लंदन। ब्रिटेन में कंप्यूटर विशेषज्ञों ने एक नई तकनीक 'ओडब्ल्यूएल दो' ईजाद करने का दावा किया है। इससे कंप्यूटर में कठिन शब्दों का अर्थ ढूंढ़ना आसान होगा। डाक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिकों के लिए यह काफी उपयोगी होगी। इस तकनीक को आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। शोध प्रमुख आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रो. इयान होराक्स ने कहा,'आज का इंटरनेट जुडे़ हुए दस्तावेजों का संकलन है। नई तकनीक से कठिन शब्दों का अर्थ खोजने में आसानी होगी।'

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