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30 सितंबर, 2009

जवानी में हो रहे हैं नपुंसक

क्या आप लैपटॉप गोदी में रखकर काम करते हैंक् क्या आप 10-12 घंटे तक मोबाइल से चिपके रहते हैं और रेडी टू ईट खाने का इस्तेमाल करते हैंक् तो ध्यान रखें आप नपुसंकता के शिकार हो सकते हैं। जयपुर में लगभग 40 फीसदी पुरूष संतान उत्पत्ति की क्षमता खो रहे हैं। ऎसा हुआ है मोबाइल और धूम्रपान के बढते शौक की वजह से।

शहर के इंफर्टिलिटी अस्पतालों में पुरूषों में इंफर्टिलिटी के करीब 40 प्रतिशत केस आ रहे हैं। एक सर्वे में पाया गया है कि राजधानी के 25 से 45 साल की आयु वाले 100 ऎसे लोगों से बात की गई जो संतानहीनता का इलाज करा रहे हैं।

इन लोगों के स्पर्म काउंट टेस्ट के बाद सामने आया है कि इनमें 60 से 90 मिलियन तक होने वाले शुक्राणु घटकर 20 मिलियन से भी कम रह गए हैं। इन कारणों की जांच के लिए जब इन लोगों की जीवनशैली का अध्ययन किया गया तो पता चला कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल, नशा, धूम्रपान, मानसिक आघात तथा शारीरिक गतिविधियां कम होना, असंतुलित खान-पान, फास्टफूड और कीटनाशकों के संपर्क में आने से जवानी में ही शुक्राणुओं की संख्या घट रही है।

सर्वे में कुल 72 लोग ऎसे मिले, जिन्हें विवाह के तीन साल तक संतान नहीं हुई है। इसमें से 50 जोडे इलाज के बाद सफल हुए,
लेकिन शेष 22 को इसके बाद भी राहत नहीं मिल सकी। चिकित्सकों का मानना है कि पुरूष सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन की मूल
रासायनिक संरचना में लगातार बदलाव आ रहे हैं और पुरूषों की प्रजनन क्षमता तेजी से घट रही है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशंस का सीधा असर
सर्वे के अनुसार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशंस का सीधा असर शुक्राणुओं की संख्या और सक्रियता पर पड रहा है। इनमें से कई लोग ऎसे भी थे जो दिनभर में 15 या उससे अधिक सिगरेट पी रहे थे और 10 से 12 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे। रेडी टू ईट खाने में इस्तेमाल प्रिजरवेटिव्स का इस्तेमाल और खाने-पीने की चीजों में प्रयुक्त होने वाले कलर्स और पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल भी पुरूष प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है।

जयपुर के डॉक्टर का शोध
एसएमएस हॉस्पिटल की मनोचिकित्सा केंद्र के इकाई प्रमुख डॉ.आरके सोलंकी की पुरूषों में बढ रही संतानहीनता पर की गई स्टडी दिल्ली साइकेट्रिक बुलेटिन में प्रकाशित हुई है। इसमें 30 पुरूष मरीजों में में साइको सेक्सुअल प्रॉब्लम को लेकर अध्ययन किया गया। इस तरह के मरीज के दिमागी तकलीफ को जांचने के लिए आईपीआईएस व डीडीआरएस स्केल का उपयोग किया गया। यह देखा कि इस तरह के मरीज शरीर में दर्द, नाखुश, घबराहट, नींद की कमी, बार-बार सेक्स के विचार आना, सेक्स करने की कमी आदि की शिकायत लेकर चिकित्सकों के पास आते हैं।

लैपटॉप का इस्तेमाल संभल कर
अगर आप लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सावधान! लैपटॉप से भी पुरूषों में सेक्स की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
जैन फर्टिलिटी एंड मदर केयर हॉस्पिटल की इंफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ.गुंजन जैन ने बताया कि लोग लैपटॉप को अपनी गोद में रखकर काम करते हैं। लैपटॉप से बहुत ज्यादा गर्मी निकलती है। इस वजह से शुक्राणुओं की संख्या में बेतहाशा गिरावट होती है।

देर से शादी, मतलब बरबादी
फिजियोथैरेपिस्ट डॉ.पूजा सिंह चौधरी ने बताया कि बढती उम्र में शादी करना भी संतानहीनता एक प्रमुख कारण है। युवा अपना करियर संवारने के चक्कर में 32 से 35 की उम्र में शादी करते हैं। युवाओं में काम का नशा उत्पन्न हो रहा है, इस वजह से वे खुद के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। काम के तनाव को कम करने के लिए एंटी डिप्रेशन दवाइयों का सेवन किया जा रहा है।

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