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15 जुलाई, 2009

निलंबित राशन दुकानों पर 90 दिनों में निर्णय

राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिन राशन दुकानों के लाइसेंस अनियमितता आदि कारण से निलंबित किये गए हैं उनके मामले में 90 दिनों के भीतर निर्णय कर लिये जाएं। मुन्द्रिका सिंह यादव के ध्यानाकर्षण प्रश्न का उत्तर देते हुए सहकारिता मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को विधानपरिषद में कहा कि जन वितरण प्रणाली को कारगर बनाये रखने के लिए निरीक्षण एवं निगरानी की व्यवस्था है। जांच के दौरान अनियमितता, कालाबाजारी या विचलन के लिए प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने पर दुकानों की अनुज्ञप्ति निलंबित की जाती है। निलंबन के पूर्व जन वितरण विक्रेता से स्पष्टीकरण पूछा जाता है, असंतोष उत्तर पाये जाने या गंभीर रूप से दोषी पाये जाने पर उनकी अनुज्ञप्ति रद भी की जाती है। मगर जनता को परेशानी नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए बगल के दुकान से इसे सम्बद्ध कर दिया जाता है। नियमित होने वाली समीक्षा बैठकों में जिलाधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि निलंबित दुकानों के मामले में 90 दिनों के भीतर लाइसेंस रद करने या आरोप मुक्त करने के बारे में फैसला कर लें। मंत्री ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के मामले में 90 दिन का फार्मूला लागू नहीं होता। जब तक न्यायालय द्वारा इन मामलों में दोषमुक्त नहीं किया जाता तब तक लाइसेंस निलंबित रखने का प्रावधान पीडीएस कंट्रोल आर्डर में है। उन्होंने खाली पड़े दुकानों के बारे में कहा कि जिलों में डीएम की अध्यक्षता में चयन समिति रहती है वही रिक्त दुकानों के आवंटन के बारे में निर्णय करती है। मुन्द्रिका सिंह, हारुन रसीद आदि सदस्यों की शिकायत थी कि निलंबन के मामले में भी न तो समय पर निर्णय किया जा रहा है न ही खाली दुकानों का आवंटन हो रहा है। इससे जनता को दिक्कत हो रही है।

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