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02 अगस्त, 2012

किसी खेल को नहीं प्राप्त है राष्ट्रीय खेल का दर्जा

ओलंपिक खेलों में लगातार छह बार गोल्ड मेडल पाने की वजह से हम हॉकी को राष्ट्रीय खेल मान लेते हैं। वास्तविकता यह है कि देश में किसी खेल को राष्ट्रीय खेल का दर्जा प्राप्त नहीं है। खेल मंत्रालय ने एक सूचना के अधिकार [आरटीआइ] याचिका के जवाब में यह जानकारी दी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं किया है। सरकार के वेब पोर्टल 'डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट इंडिया डॉट जीओवी डॉट इन' पर डाले गए एक लेख में मैदानी हॉकी को राष्ट्रीय खेल के तहत रखा है। राष्ट्रीय प्रतीकों के बारे में जानने को इच्छुक लखनऊ की दस वर्षीया ऐश्वर्य पराशर ने प्रधानमंत्री कार्यालय [पीएमओ] में आरटीआइ दाखिल की। उसने राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, खेल, जानवर, चिड़िया, फूल और राष्ट्रीय चिन्ह कब घोषित किया उसके आदेश की प्रमाणित प्रति की मांग की। पीएमओ ने उसकी याचिका गृह मंत्रालय को भेजी गई और उसने इसका जवाब देने के लिए युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय को भेज दिया। जवाब में खेल मंत्रालय के अवर सचिव शिव प्रताप सिंह तोमर ने ऐश्वर्या को हिंदी में यह लिखकर भेजा कि मंत्रालय ने किसी खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं किया है।
आश्चर्य की बात यह है कि सरकार के पोर्टल पर 14 राष्ट्रीय प्रतीक दिए गए हैं जिनमें झंडा, पक्षी, फूल, पेड़, गान, नदी, जलीय जानवर, राष्ट्र चिन्ह, कैलेंडर, जानवर, गीत, फल, खेल और मुद्रा का प्रतीक शामिल है।

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