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08 जून, 2012

शराब बिहार की, नशा यूपी में

इस समय बिहार की शराब यूपी सीमा पर रहने वालों को धड़ल्ले से मदहोश कर रही है। बंटी-बबली, झूम व लैला का नशा अब इनपर असरदार साबित नहीं हो रहा। इसका फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने बिहार में बनी शराब बड़े पैमाने पर उत्तर प्रदेश के सीमाई इलाकों में पहुंचाना शुरू कर दिया है। बिहारी शराब के इस बाजार में बढ़ते दखल से जहां राजस्व को क्षति पहुंच रही है, वहीं स्थानीय शराब कारोबारी कोटे की खपत को लेकर भी चिंतित है। उन्हे समझ नहीं आ रही कि कीमतों में अंतर होने का फायदा उठा रहे लोगों पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है।

सीमावर्ती इलाकों में बिहार निर्मित शराब का कारोबार चरम पर है। बार्डर पर सक्रिय शराब के अवैध कारोबारी यहां ऊंचे दाम पर बिक रही देशी शराब के बदले लोगों में पड़ोसी प्रांत बिहार में कम दाम पर बिक रही देशी शराब को उपलब्ध करा रहे है।

यूपी में 45 से 60 रुपये तक अलग - अलग दरों पर बिक रही झूम, बंटी - बबली, ओल्ड फ्रैंड, आरेज व लैला ब्रांड की शराब बिहार में टैक्स व एमआरपी कम होने से 18 रुपये तक में उपलब्ध हो जाती है। दाम कम होने के चलते यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों में देशी बिहारी शराब की मांग बढ़ गई है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय अवैध कारोबारी इस धंधे को धड़ल्ले से अंजाम दे कर शौकीनों में बेरोक-टोक इसकी आपूर्ति कर रहे है। शराब व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार जिले की सीमा पर स्थित अनेक दुकानदार भी अब यूपी की बजाय बिहारी शराब की आपूर्ति कर रह है।

जानकार बताते है कि कीमत कम होने से शराब के अवैध कारोबारी बिहार निर्मित शराब को बांसी, जटहाबाजार, कठकुइयां, दुदही, गोड़रिया, मंसाछापर, खिरकिया, पडरौना, बनबीरपुर, बसहिया, सिधुआ बाजार समेत जिले के अन्य कस्बों में इसकी आपूर्ति कर अच्छी आमदनी कर रहे है।

जानकार बताते है कि शराब के इस धंधे में आबकारी विभाग के भी कुछ लोगों की मिली भगत है, जिससे राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है । वहीँ जिला के आबकारी अधिकरी एसके राय कहते हैं कि मिलावटी व बिहार निर्मित शराब की बिक्री होने की सूचना पर छापामारी कर त्वरित कार्रवाई की जाती है। शीघ्र ही अभियान चलाकर इस पर काबू पा लिया जाएगा।

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