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10 जून, 2012

आमिर ने 'सत्यमेव जयते' में मिलवाया असली नायकों से

आमिर खान के रियलिटी शो सत्यमेव जयते में आज नायकों की बात की गई, ऐसे नायकों की जो किसी न किसी वजह से सामान्य इन्सानों से कमतर नजर आते हैं, लेकिन वे हैं नहीं।

विकलांगता के मुद्दे को उठाते हुए आमिर खान ने अपने शो में ऐसे लोगों को पेश किया जिन्होंने विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाया। उन्होंने केके नाम के नेत्रहीन व्यक्ति को दिखाया जो आज सफल उद्यमी हैं।

निशा नाम की एक लड़की को दिखाया गया जो त्वचा की एक बीमारी की वजह से देखने में सामान्य नहीं लगतीं। उसे उसके माता पिता ने उसे एक आश्रम से गोद लिया, उसे सामान्य जिंदगी दी और उसे बहादुरी से अपनी विकलांगता से लड़ना सिखाया। निशा की कहानी दिखाते हुए आमिर खुद भावुक हो गए।

आमिर ने अपने शो में सामाजिक ढांचे को बदलने की भी बात की। कहीं भी विकलांगों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न होने का मुद्दा उठाया गया। शो का मेसेज समाज के लिए तो था ही, सरकार के लिए भी था।

शो में बात की गई कि एजुकेशनल संस्थानों में विकलांग बच्चों के लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं। यहां तक कि स्कूलों में विकलांग बच्चों को दाखिले तक नहीं दिए जाते।

ऐसे कई बच्चों की मिसालें शो के दौरान पेश की गईं जिन्हें किसी न किसी विकलांगता की वजह से पढ़ाई से दूर होना पड़ा। इनमें गरीब और अमीर सभी के बच्चे हैं जिन्हें समाज और व्यवस्था हिकारत की नजर से देखती है।

आमिर ने अपने शो निजी कंपनियों में विकलांगों को नौकरियां न दिया जाने के मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दिखाया कि कंपनियां जानबूझ कर विकलांगों को नौकरी देने से बचती हैं। हालांकि एक दो ऐसे उदाहरण पेश किए गए जहां कंपनियों ने विकलांगों को न सिर्फ नौकरियां दीं बल्कि उनके दम पर तरक्की भी की।

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