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03 मई, 2012

12 दिनों बाद रिहा हुए कलेक्टर

रायपुर। अगवा होने के 12 दिनों बाद छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के जिलाधिकारी एलेक्स पॉल मेनन को रिहा कर दिया। मेनन को अगवा करने वाले नक्सलियों ने उन्हें वार्ताकार बीडी शर्मा और प्रोफेसर जी हरगोपाल को सौंप दिया है।


इससे पहले सुकमा के कलेक्टर एलेक्स पाल मेनन को लेने के लिए दोनों मध्यस्थ डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा और प्रो. हरगोपाल आज सुबह आठ बजे हेलीकॉप्टर से रायपुर से चिंतलनार के पुलिस कैंप पहुंचे थे। कुछ देर रुकने के बाद मध्यस्थ जीप से ताड़मेटला पहुंचे थे। ताड़मेटला के जंगल के पास पूरे काफिले को नक्सलियों ने रोक लिया। नक्सलियों के साथ दोनों मध्यस्थ पैदल ही अंदर रवाना हुए थे।

कलेक्टर को ताड़मेटला के जंगल से बाहर लाने के लिए के बिना नंबर की सफेद बोलेरो जीप का इंतजाम किया गया था। ताड़मेटला और चिंतलनार के बीच की दूरी 10 किलोमीटर बताई जा रही है। चिंतलनार पहुंचने के बाद कलेक्टर को हेलीकॉप्टर से लेकर जाने की योजना है। यह साफ नहीं है कि पॉल को पहले सुकमा ले जाएगा या नहीं। पॉल की पत्नी इस समय सुकमा में है। नक्सलियों ने दोनों के साथ जंगल के भीतर घुसने की कोशिश कर रहे मीडिया कर्मियों को चिंतलनार में वापस भेज दिया और उनसे कलेक्टर की रिहाई का इंतजार करने कहा। नक्सलियों ने डीएम को रिहा करने के लिए शर्मा और हरगोपाल के नाम छत्तीसगढ़ सरकार को सुझाए थे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने मेनन की रिहाई के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। नक्सलियों की कैद से छूटने के बाद अब मेनन का मेडिकल टेस्ट किया जाएगा। सरकार ने सुकमा, दंतेवाड़ा, जगदलपुर के अलावा रायपुर के स्वास्थ्य अधिकारियों को तैयार रहने को कहा है। चूंकि, मेनन दमा के मरीज हैं, इसलिए चिंतलनार में एक एंबुलेंस को तैनात किया गया है।


गौरतलब है कि नक्सलियों और सरकार के बीच मेनन की सुरक्षित वापसी के लिए समझौता 30 अप्रैल को चौथे दौर की बातचीत में हुआ था। समझौते के तहत सरकार मेनन की रिहाई के बाद एक घंटे के भीतर निर्मला बुच की अध्यक्षता में उच्च अधिकार प्राप्त समिति का गठन करेगी, जो छत्तीसगढ़ की विभिन्न जेलों में बंद कैदियों के मामलों की समीक्षा करेगी। इसमें वे मामले भी शामिल होंगे जिनकी मांग नक्सलियों ने की है। नक्सलियों और सरकार के बीच मेनन की रिहाई के लिए बीडी शर्मा, प्रोफेसर जी हरगोपाल, मनीष और निर्मला बुच ने मध्यस्थता की थी। एलेक्स पॉल मेनन को 21 अप्रैल को हथियारबंद नक्सलियों ने तब अगवा कर लिया था जब वे सुकमा जिले के एक गांव के दौरे पर थे।

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