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16 अक्तूबर, 2010

प्रधानमंत्री ने खेल की जांच सौंपी

नई दिल्ली : राष्ट्रमंडल खेल खत्म होने के 24 घंटे के भीतर ही सरकार ने तैयारियों के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूर्व महालेखा नियंत्रक वी।के। शुंगलू को खेल के पीछे हुए खेल की जांच का जिम्मा सौंपा है। राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों से लेकर आयोजन संपन्न होने तक की हर कड़ी इस जांच की खुर्दबीन के नीचे होगी। केंद्र सरकार और कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि सफल आयोजन से तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार के दाग नहीं धुलेंगे। सीवीसी और ईडी जैसी जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं और अगले आदेश का इंतजार कर रही हैं। सीएजी ने खर्चो के बहीखाते खंगालने शुरू कर दिए हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पदक विजेता खिलाडि़यों के लिए अपने आवास पर आयोजित समारोह से आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को दूर रख भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार के इरादों को जाहिर भी कर दिया था। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार दिन में सभी खिलाडि़यों को आमंत्रित किया, लेकिन कलमाड़ी को नहीं बुलाया। इतना ही नहीं, देर शाम उन्होंने पूर्व महालेखा नियंत्रक वी।के। शुंगलू को राष्ट्रमंडल खेलों की जांच सौंप दी। उनकी जांच के दायरे में पीएमओ ने आर्गनाइजेशन एंड कंडक्ट आफ कॉमनवेल्थ गेम्स लिखा है। शुंगलू की मदद के लिए प्रधानमंत्री ने कैबिनेट सचिव के।एम. चंद्रशेखर को हर सुविधा और सहूलियत मुहैया कराने के निर्देश भी दिए हैं। जाहिर है कि एक सदस्यीय शुंगलू समिति पूरे आयोजन में पैसे के लेन-देन का हिसाब-किताब भी जांचेगी। प्रधानमंत्री ने शुंगलू से तीन माह में पूरी रिपोर्ट देने को कहा है। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी तत्काल अपनी जांच तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सीवीसी ने राष्ट्रमंडल की तैयारियों और निर्माण से जुड़े करीब 30 मामलों पर अपनी जांच को गति दी है। कैग तो खैर पहले से ही पूरे आयोजन के बहीखाते की धांधलियों की तरफ इशारा कर रहा था। अब खेल खत्म होने के बाद उसने फिर बहीखाते पलटना शुरू कर दिया है। उधर, संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति और लोक लेखा समितियां भी राष्ट्रमंडल खेलों के पीछे हुए खेल की परतें उघाड़ने के लिए तैयार बैठी हैं। राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता के बाद भ्रष्टाचार का मुद्दा पीछे नहीं छूटेगा, यह संदेश सरकार और कांग्रेस ने देने में जरा भी देर नहीं लगाई। विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने राष्ट्रमंडल खेलों के पीछे हुए खेल की जांच तेजी से चलने की तरफ साफ इशारा किया है। कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों ने भी कहा कि पार्टी की संसदीय समिति में सोनिया गांधी राष्ट्रमंडल के पीछे हुए भ्रष्टाचार के खेल पर चिंता जता चुकी हैं। तथ्य यह भी है कि संसद की दो उच्च समितियां- लोक लेखा समिति (पीएसी) और वित्त मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष का पद भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के पास है जो राष्ट्रमंडल खेलों का कच्चा चिट्ठा पलट ही रही हैं। महालेखा नियंत्रक (सीएजी) की रिपोर्ट पीएसी के पास आएगी और उसके अध्यक्ष वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी हैं। सीएजी ने तो खातों की जांच खेल खत्म होते ही शुरू होने का एलान भी कर दिया। वित्त मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा हैं। जाहिर है कि इन दोनों ताकतवर समितियों में विपक्ष के अध्यक्ष होने के नाते तथ्यों को छिपाना सरकार के लिए संभव नहीं होगा। ऐसे में सरकार ने पहले ही जांच तेज कर विपक्ष के लिए राजनीति की गुंजाइश ही नहीं रखी है।

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