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01 फ़रवरी, 2010

...फिर पैसा नहीं बनेगा पढ़ाई में रोड़ा

उच्च शिक्षा हासिल करने में पैसा कहीं भी रोड़ा न बने, इसके लिए केन्द्र सरकार एजुकेशन फाइनेंस कॉर्पोरेशन बनाने की योजना बना रही है। इससे समाज के हर वर्ग के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए ऋण दिया जाएगा, जिसे वे नौकरी मिलने के बाद चुका सकते हैं।

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने आज बताया कि केन्द्र सरकार चाहती है हर बच्चा उच्च शिक्षा ग्रहण करे, लेकिन कुछ मामलों में अर्थसंकट आड़े आ जाता है।

उन्होंने कहा कि इस समस्या को देखते हुए सरकार ने एजुकेशन फाइनेंस कॉर्पोरेशन बनाने की योजना तैयार की है, जिसमें बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आसान शर्तों पर ऋण मिल सकेगा।

सिब्बल के अनुसार बच्चे वह ऋण तब अदा करेंगे, जब पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें नौकरी मिल जाएगी। इस बारे में योजना आयोग से बात चल रही है। सिब्बल ने उम्मीद जताई कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में इस बारे में एक आयोग का गठन हो जाएगा।

सिब्बल ने कहा कि किसी भी देश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) को अगर बढ़ाना है और दो अंकों तक पहुँचाना है तो उस देश की युवा पीढ़ी को शिक्षित कर स्वावलंबी बनाना होगा। इसीलिए केन्द्र सरकार हर बच्चे को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए प्रयत्नशील है और इसी के तहत ये प्रयास किए जा रहे हैं।

देश में 22 करोड़ बच्चे जाते हैं स्कूल : शिक्षक संघ के एक कार्यक्रम में भाग लेने कानपुर आए सिब्बल ने बताया कि आज देश में करीब 22 करोड़ बच्चे स्कूल जाते हैं। इनमें से करीब ढाई फीसदी बच्चे ही उच्च शिक्षा के लिए डिग्री कॉलेज या विश्वविद्यालय पहुँच पाते हैं, जबकि विकसित देशों में करीब 40 फीसदी बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं। केन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2020 तक देश में 30 फीसदी बच्चे उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय जा सकें।

2020
तक 1000 विश्वविद्यालय खोलने का लक्ष्य : सिब्बल ने कहा कि देश में इस समय 480 विश्वविद्यालय और करीब 22 हजार कॉलेज हैं। चूँकि 2020 तक हमारा लक्ष्य 30 फीसदी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए भेजना है, इसलिए हमें और कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों की आवश्यकता होगी।

केन्द्र सरकार की योजना है कि वर्ष 2020 तक देश में कम से कम 1000 विश्वविद्यालय और करीब 35 हजार कॉलेज होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि इतने अधिक कॉलेज और विश्वविद्यालय खोलने के लिए केन्द्र सरकार निजी संस्थाओं और संगठनों की तो मदद लेगी, साथ ही भारत आने के इच्छुक विदेशी शिक्षण संस्थानों को भी मौका दिया जाएगा ताकि देश में अधिक से अधिक बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें।

देश के सर्वाधिक पिछड़े और गरीब इलाकों में 6000 मॉडल स्कूल खोले जाने की योजना भी है। इसमें बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मिलेगी। इसके लिए 3500 पिछड़े इलाकों की पहचान कर ली गई है, जहाँ ऐसे स्कूल खोले जाना हैं। 2500 मॉडल स्कूल पब्लिक प्राइवेट योजना के तहत कम पिछड़े इलाकों में भी खोले जाएँगे।

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