प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार महँगाई को लेकर हर संभव कदम उठा रही है। इसे जल्द ही काबू में कर लिया जाएगा। उन्होंने राज्यों से खाद्य वस्तुओं के निर्यात को पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा नहीं हो सकता है तो इसे हतोत्साहित जरूर करें।
यहाँ मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में मनमोहन ने कहा कि महँगाई की समस्या आज की नहीं है। यह एनडीए के कार्यकाल से चली आ रही है। फिर भी हम इसे रोकने के लिए हरसंभव कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करें कि किसानों को अच्छा समर्थन मूल्य मिले। उन्हें हर हाल में अधोसंरचना के स्तर पर बेहतर मदद की जाए। प्रधानमंत्री ने जमाखोरों को आवश्यक वस्तु कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
प्रधानमंत्री ने बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए खुदरा कारोबार को खोलने का समर्थन किया और कहा कि थोकमूल्य और खुदरा कीमत में बहुत फर्क है। फिलहाल सिर्फ घरेलू कंपनियों को ही खुदरा क्षेत्र में कारोबार की मंजूरी है। सरकार ने खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी देने के संबंध में फैसला नहीं किया है। हालाँकि विदेशी कंपनियों को थोक कारोबार की मंजूरी है।
उन्होंने कहा हमें और प्रतिस्पर्धा की जरूरत है, इसलिए खुदरा कारोबार को खोलने के संबंध में दृढ़ता से विचार करने की जरूरत है।
राज्य और स्थानीय स्तर पर लगने वाले कई किस्म के कर एवं शुल्कों के बारे में चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि इन सबके कारण में आवश्यक वस्तुओं की कीमत 10 से 15 फीसद बढ़ी है। उन्होंने कहा इस पर विचार करने की जरूरत है।
दाल कीमत में हो रही तेजी का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जल्दी ही राष्ट्रीय दाल मिशन लाँच करेगी, ताकि आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि दाल का घरेलू उत्पाद पिछले कई सालों से स्थिर है। सरकार ने घरेलू स्तर पर उगाई जाने वाली दालों की बजाय पीली मटर का आयात किया है, ताकि आपूर्ति बढ़ाई जा सके।
चीनी के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने उत्पादन में कमी की भरपाई के लिए शून्य शुल्क पर कच्ची और रिफाइंड चीनी के आयात को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा हमें आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण में तेजी लाना चाहिए और सामने आने वाली सभी मुश्किलों को दूर करना चाहिए। देश को चीनी की आवधिक कमी पूरी करने के लिए देश को एक नई मध्यम अवधि की नीति की जरूरत है।
मूल्य संबंधी मुश्किलों से निपटने के लिए राज्य सरकारों की ढीली-ढाली प्रतिक्रिया पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा मुझे यह कहते हुए दुःख हो रहा है कि ओएमएसएस के तहत राज्य सरकार द्वारा गेहूँ और चावल का उठान उत्साहजनक नहीं रहा।
प्रधानमंत्री ने खाद्य पदार्थों की ऊँची कीमत के लिए वैश्विक कीमतों में तेजी और मानसून की असफलता जैसे तत्वों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा हमने आय को सुरक्षित करने के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन कीमतों पर लगाम लगाने में हमें ज्यादा सफलता नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि सरकार ने रियायती दर पर डीजल और बीज उपलब्ध कराए, ताकि बारिश की कमी का मुकाबला किया जा सके और खाद्य वस्तुओं के शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दी गई जबकि उनका निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे पास खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार है। सरकार ने इसे लगातार उच्च स्तर पर बनाए रखा है। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की कि केंद्र जल्द ही 25 लाख टन गेहूँ पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के माध्यम से जारी किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों से महँगाई के खिलाफ केंद्र का सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा जब तक केंद्र और राज्य मिलकर काम नहीं करेंगे, महँगाई पर काबू नहीं पाया जा सकता।
मनमोहन ने कहा कि महँगाई की एक अहम वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चढ़ती कीमतें भी हैं। फिर हम भी दामों को नीचे लाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा राज्य इस बात का ध्यान रखें कि केंद्र द्वारी जारी राशन जरूरतमंद लोगों तक आसानी से और जल्द पहुँचे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्य वितरण प्रणाली पुरानी हो चुकी है और इसे पूरी तरह से नया रूप देने की जरूरत है। उन्होंने कहा खाद्य मुद्रास्फीति दर में कुछ कमी तो आई है, लेकिन इसे और नीचे लाने की जरूरत है।
मायावती नहीं हुईं बैठक में शामिल : उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री के साथ बैठक का बहिष्कार किया। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार के मंत्रियों के बयानों में महँगाई को लेकर कोई एकरूपता नहीं है। उनका कहना था यह बैठक काफी पहले बुलाई जाना थी।
उल्लेखनीय है कि यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई, जब खाद्य मुद्रास्फीति का स्तर दिसंबर में दशक के सबसे उच्च स्तर 20 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
सरकार की ओर से आपूर्ति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आयात को आसान बनाने तथा कई वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने जैसे कदम उठाने के बावजूद पिछले कुछ महीनों में चीनी, दाल और सब्जियों आदि की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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