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07 फ़रवरी, 2010

अतिवादी ताकतें सबसे बड़ा खतरा-मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने भारत में बढ़ते घुसपैठ के प्रयासों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है आंतरिक सुरक्षा के प्रति खतरों से निपटने के लिए केन्द्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

आंतरिक सुरक्षा पर यहाँ आयोजित मुख्यमंत्रियों की बैठक में सिंह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद, सीमा पार से संचालित आतंकवाद, पूर्वोत्तर में विद्रोह तथा साम्प्रदायिक और क्षेत्रीय तनाव को हवा देना आंतरिक सुरक्षा की मुख्य चुनौतियाँ हैं। इन खतरों का सामना केन्द्र तथा राज्यों के बीच अच्छे तालमेल से ही किया जा सकता है।

उन्होंने कहा हमारी सुरक्षा के प्रति बड़े खतरों से आप सब अवगत हैं। शत्रुतापूर्ण समूह और तत्व हमारे देश में आतंकी कार्रवाई करने के लिए सीमा पार से कार्रवाई करते हैं। जम्मू-कश्मीर इन समूहों की कार्रवाइयों का खामियाजा भुगत रहा है।

जाली नोट पर लगाएँ रोक : प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पार से भारतीय मुद्रा के जाली नोट भी छाप छाप कर हमारे यहाँ बाजार में प्रसारित किए जा रहे हैं। जाली मुद्रा के प्रसार पर रोक के लिए राज्यों को आपस में और अधिक तालमेल करना चाहिए। इसके लिए विशिष्ट एजेंसियाँ भी बनाना चाहिए।

नक्सलवाद, माओवाद बड़े खतरे : प्रधानमंत्री ने अपने इस रुख को दोहराया कि नक्सलवाद और माओवाद जैसा अतिवादी वामपंथी उग्रवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे अधिक खतरा है। उन्होंने कहा कि सीमापारीय आतंकवाद और अतिवादी वामपंथी उग्रवाद देश के लिए सबसे बड़े खतरे तो हैं ही, लेकिन इनके साथ ही कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो समाज को साम्प्रदायिकता और क्षेत्रीयता में बाँटने का प्रयास कर रहे हैंउन्होंने कहा इन सब खतरों से निपटने के लिए हमें प्रतिबद्धता, कड़ी मेहनत और सतत सजग रहने की आवश्यकता है।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ बढ़ी : उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2008 के मुकाबले 2009 में आतंकी घटनाओं में काफी कमी आई है, लेकिन इसी अवधि में घुसपैठ का स्तर बढ़ा है। हाल ही में ऐसी कुछ घटनाएँ हुई हैं, जो परेशान करने वाली हैं।

अतिवादी वामपंथी उग्रवाद को देश की सुरक्षा के बड़े खतरों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे निपटते समय इस बात का ख्याल रखा जाए कि इनसे हमारी जनता, खासकर आदिवासी हमसे विमुख नहीं हो जाएँ।

नक्सली इलाकों में चलाएँ विकास कार्य : उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों में उग्रवादियों से निपटने के साथ ही सामाजिक और आर्थिक विकास के कार्य चलने चाहिए। उन क्षेत्रों के लोगों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए।

राज्यों से सहयोग की उम्मीद : प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि आतंकवाद के खिलाफ शक्तिशाली और एकजुट लड़ाई के लिए सभी राज्य केन्द्र द्वारा गठित राष्ट्रीय जाँच एजेंसी का पूर्ण संभावित उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि आज की दुनिया में बहुत से मुद्दे ऐसे हैं जिनसे निपटने के लिकेवल राज्यों के बीच ही नहीं, बल्कि केन्द्र और राज्यों में भी नजदीकी समन्वय की जरूरत है।

सिंह ने कहा आंतरिक सुरक्षा निश्चित तौर पर इनमें से एक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारी शांति, और हमारी वृद्धि तथा विकास को प्रभावित करता है।

विशिष्ट कमांडो बल बनाएँ : उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे अपने-अपने राज्यों में विशेष जाँच एजेंसियाँ और द्रुत प्रतिक्रिया दल गठित करें। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों से विशिष्ट कमांडो बल बनाने को भी कहा, जो आतंकवादी कार्रवाई से कड़ाई से निपट सकें।

राज्यों से उनके पुलिस बलों में रिक्त पड़े तीन लाख 94 हजार स्थानों को भरने की कार्रवाई तेज करने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी संख्या है। पुलिस बलों का 20 प्रतिशत रिक्त रहना ठीक नहीं है।

उन्होंने पुलिस ढाँचे का विकास करने और उनके प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए इन मदों के लिए राज्यों के बजट आवंटन में बढ़ोतरी करने को कहा

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