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10 जनवरी, 2010

भारत आइडिया कप के फाइनल में

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शेरे-ए-बांग्ला स्टेडियम पर आइडिया कप त्रिकोणीय एकदिवसीय क्रिकेट श्रृंखला के पाँचवें मैच में भारत ने श्रीलंका को 8 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। भारत को जीत के लिए 214 रनों का लक्ष्य मिला, जिसे उसने 32.4 ओवर में 2 विकेट खोकर अर्जित कर लिया। निर्णायक मौके पर तीन विकेट प्राप्त करने वाले जहीर खान को 'मैन ऑफ द मैच' घोषित किया गया।

विराट कोहली 71 और युवराज सिंह 8 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत ने इस जीत के साथ बोनस अंक भी अर्जित किया। इस पूरे मैच में एक भी छक्का नहीं लगा, जबकि सबसे तेज अर्धशतक लगाने के लिए कुमार संगकारा को पुरस्कृत किया गया। कप्तान धोनी ने इस जीत का सेहरा गेंदबाजों के सिर बाँधा। हालाँकि उन्होंने दिनेश कार्तिक और गौतम गंभीर की बल्लेबाजी की प्रशंसा भी की।

जीत के लिए 214 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम की शुरुआत तेज रही। भारत का पहला विकेट दिनेश कार्तिक (48) के रुप में पैवेलियन लौटा, जिन्हें थिलन तुषारा की गेंद पर कुमार संगकारा ने लपका। कार्तिक और गंभीर ने पहले विकेट के लिए 89 रन जोड़े।

इसके बाद गंभीर शानदार अर्धशतक (71) लगाकर परेरा की गेंद पर वेलेगेदरा को कैच थमा बैठे। भारत ने दूसरा विकेट 161 रनों के कुल स्कोर पर खोया। गंभीर ने कोहली के साथ दूसरे विकेट के लिए 17 ओवरों में 72 रन जोड़े।

इससे पूर्व श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। जहीर खान (38/3) और अमित मिश्रा (40/3) की शानदार गेंदबाजी के आगे लंकाई बल्लेबाज 46.1 ओवर में 213 रन पर ही ढेर हो गए। कुमार संगकारा 68 और सूरज रणदीव 56 रनों की पारी नहीं खेलते तो ‍श्रीलंका गहरे संकट में फँस जाता।

एक समय श्रीलंका की टीम ने 19 ओवर के भीतर ही 84 रनों पर 6 विकेट गँवा दिए थे और ऐसा लगने लगा था कि भारतीय टीम श्रीलंका को 150 रन के भीतर समेट लेगी लेकिन संगकारा और रणदीव ने साहस के साथ बल्लेबाजी करते हुए स्कोर को 200 के पार लगाया। भारत की तरफ से जहीर और अमित मिश्रा के अलावा श्रीसंथ, त्यागी और युवराज ने 1-1 विकेट आपस में बाँटे।

लंका शुरुआत खराब रही और पहले ही ओवर में उसके सलामी बल्लेबाज उपुल थरंगा (0) सुदीप त्यागी की गेंद पर दिनेश कार्तिक को कैच थमा बैठे। इसके बाद दिलशान के बल्ले से एक साथ कई चौके निकले, लेकिन छठे ओवर में 33 रन के निजी स्कोर पर वे भी जहीर खान की गेंद पर गौतम गंभीर द्वारा लपक लिए गए।

ऊपरी क्रम के ढहने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। दिलशान के बाद जयवर्धने भी महज पाँच रन बनाकर चलते बने। उन्हें भी जहीर ने विराट कोहली के हाथों झिलवा कर अपना शिकार बनाया। उनके बाद आए समरवीरा (0) भी कुछ कमाल नहीं दिखा पाए। उन्हें श्रीसंथ ने पगबाधा आउट कर दिया।

श्रीलंकाई खेमे को एक और निराशा उस समय हाथ लगी, जब मध्यक्रम के भरोसेमंद खिलाड़ी कादम्बी रन लेने की कोशिश में (1) जहीर की गेंद पर आउट करार दे दिए गए। भारतीय गेंदबाजों के निशाने पर इस बार थिषारा परेरा (11) थे। उन्होंने अमित मिश्रा की गेंद पर युवराज ने शानदार कैच कर लपक लिया।

सातवें विकेट पर संगाकारा (68) का नाम लिखा था। उन्हें 30वें ओवर में युवराज की गेंद पर सुरेश रैना ने लपकने में कोई गलती नहीं की। इसके बाद सूरज रणवीद (56) को अमित मिश्रा ने बोल्ड कर दिया। थिलन तुषारा भी 28 रन के निजी स्कोर पर जहीर के शिकार बने। श्रीलंका का अंतिम विकेट चानका लकमल (1) के रूप में पैवेलियन लौटा। उन्हें धोनी ने मिश्रा की गेंद पर स्टंप आउट किया। इस तरह श्रीलंका की टीम 46.1ओवर में 213 रन ही बना सकी।

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