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18 दिसंबर, 2009

रेलवे के पिछले पाँच साल के कामकाज पर लोकसभा में शनिवार को पेश किए गए श्वेतपत्र में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के रेलवे द्वारा रिकॉर्ड मुनाफा कमाने के दावों की एक तरह से हवा निकाल दी गई है और कहा गया है कि उनके कार्यकाल में रेलवे का कार्य निष्पादन सामान्य से नीचे रहा।
रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा पेश श्वेत पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2004-05 से वर्ष 2008-09 के बीच रेलवे का कार्य निष्पादन सामान्य से नीचे रहा। तब राजद प्रमुख लालू प्रसाद रेल मंत्री थे।
श्वेत पत्र में कहा गया है कि उस अवधि के दौरान रेलवे के कुल विकास का विश्लेषण दर्शाता है कि यदि परिवहन में 1.25 की इलैस्टिसिटी वृद्धि लागू की जाती है तो संपूर्ण अवधि में यातायात से संबंधित वृद्धि औसत से कम रही है। प्राप्त इलैस्टिसिटी मात्र 0. 79 के इर्दगिर्द घूम रही है तथा राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में रेलवे उद्योग का योगदान 1.18 पर स्थिर है।
वर्ष 2008-09 में यात्री संचालन मद में रेलवे को हुए 14 हजार करोड़ रुपए के घाटे को रेखांकित करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि लालू के कार्यकाल में लेखाओं के पेश करने का एक नया तरीका शुरू किया गया, जिसके तहत लाभांश से पहले नकदी अधिशेष की अवधारणा लागू की गई, जिससे रेलवे की वित्तीय हालत अच्छी दिखी।
ममता ने श्वेत पत्र के साथ ही भारतीय रेल का विजन पत्र 2020 भी पेश किया। वर्ष 2009-2010 के अपने रेल बजट भाषण में ममता ने इस तरह का श्वेत पत्र पेश करने का वादा किया था। इस श्वेत पत्र में वर्ष 2003-2004 से वर्ष 2008-2009 तक रेलवे के संगठनात्मक, परिचालन और वित्तीय कामका ज के संबंध में आधारभूत सूचना प्रदान करने के साथ ही रेलवे की उपलब्धियों और कमियों को उजागर करते हुए कार्य निष्पादन का विश्लेषण पेश किया गया है।
श्वेत पत्र में ममता ने कहा कि मेरी मंशा आत्मविश्लेषण और विश्लेषण करने की है। विश्लेषण के परिणामस्वरूप जिन कमजोरियों को दर्शाया गया है उसका खुलासा इस दस्तावेज में किया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रेलवे की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में यह श्वेत पत्र मदद करेगा ताकि भविष्य के लिए सुधारात्मक और रचनात्मक कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि हाल में रेलवे का वित्तीय कायाकल्प चर्चा और बहस का विषय बना रहा। इस पत्र में इस मुद्दे की निष्पक्ष जाँच करने का प्रयास किया गया है।
उधर, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद ने इस श्वेतपत्र को खारिज करते हुए इसे ‘ब्लैक पेपर’ करार दिया और कहा कि रिकॉर्ड मुनाफे का उनका दावा सही है और रेल मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल रेलवे का सर्वश्रेष्ठ काल था। उन्होंने कहा कि राजस्व प्राप्ति के मेरे आँकड़ों पर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कुछ अधिकारियों ने ममता को गुमराह किया और उन्हें पता लगाना चाहिए कि ये अधिकारी कौन हैं।
लालू ने ममता के दावों को लेकर एक प्रकार से उन्हें चुनौती दी। श्वेतपत्र में मुनाफा संबंधी आँकड़ों के बारे में कहा गया है कि यदि आँकड़ों को एक नए रूप में पेश नहीं किया जाता तो पिछले पाँच साल में 89 हजार करोड़ रुपए का कुल अधिशेष 39, 500 करोड़ रुपए पर आ जाता। इस कटौती में वेतन आयोग के चलते बकाए का भुगतान भी शामिल है, जिसमें पिछले कई सालों का बकाया शामिल था।
लालू के कार्यकाल को रेलवे का स्वर्णिम युग बताए जाने के दावों की पोल खोलते हुए श्वेतपत्र कहता है कि पिछले 20 सालों में वित्तीय रूप से सबसे बढ़िया समय 1991- 96 का था न कि पिछले पाँच साल। गौरतलब है कि 1991-96 में सीके जाफर शरीफ रेल मंत्री थे। यह विश्लेषण रेलवे के वित्तीय प्रदर्शन और लेखा प्रणाली के अध्ययन के लिए नियुक्त कंसलटेंट द्वारा किया गया है।
श्वेतपत्र में कहा गया है कि वैगनों की भार क्षमता में वृद्धि, टर्मिनल डिटेंशन में कमी तथा रखरखाव चक्र में वृद्धि से माल भाड़े में वृद्धि करने में मदद मिलीपत्र कहता है कि मालभाड़ा राजस्व में 14. 11 फीसदी की सीएजीआर से वृद्धि हुई। पिछले पाँच साल में मालभाड़ा दरों में काफी वृद्धि की गई, जिनमें खाद्यान्न की 44 फीसदी वृद्धि और उर्वरकों में 35 फीसदी वृद्धि भी शामिल है।
श्वेत पत्र में किसी को निशाना नहीं बनाया : रेल मंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि रेलवे के वित्तीय हालात पर लोकसभा में पेश श्वेत पत्र में किसी को निशाना नहीं बनाया गया है, बल्कि यह श्वेत पत्र रेल प्रणाली को मजबूत करने के इरादे से लाया गया है। संसद में पेश इस दस्तावेज पर पूर्व रेल मंत्री एवं राजद प्रमुख लालू प्रसाद की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए ममता ने कहा कि श्वेतपत्र में किसी को निशाना नहीं बनाया गया है और यह केवल रेलवे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

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