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18 दिसंबर, 2009

श्रीलंका ने भारत को ती‍न विकेट से हराया

धोनी पर भारी, दिलशान की पारी
तिलकरत्ने दिलशान ने अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखते हुए लगातार दूसरा शतक जमाकर भारतीय कप्तान महेंद्रसिंह धोनी के जुझारू शतक पर पानी फेरते हुए विदर्भ क्रिकेट संघ स्टेडियम में दूसरे एकदिवसीय में श्रीलंका को तीन विकेट की जीत के साथ पाँच मैचों की श्रृंखला में 1-1 से बराबरी दिला दी।


भारत ने धोनी (107) के संकल्पपूर्ण शतक और सुरेश रैना (68) के साथ उनकी 119 गेंद में 126 रन की साझेदारी की मदद से सात विकेट पर 301 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में श्रीलंका ने दिलशान की 123 रन की पारी की बदौलत 49.1 ओवर में सात विकेट पर 302 रन बनाकर मैच जीत लिया।

दिलशान ने 113 गेंद की अपनी पारी में 12 चौके और दो छक्के लगाने के अलावा उपुल थरंगा (37) के साथ पहले विकेट के लिए 102 और महेला जयवर्धने (39) के साथ तीसरे विकेट के लिए 66 रन जोड़े। एंजेलो मैथ्यूज ने अंत में 25 गेंद में चार चौकों की मदद से नाबाद 37 रन की पारी खेलकर श्रीलंका को जीत दिला दी।

मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने उतरे श्रीलंका को दिलशान और थरंगा की सलामी जोड़ी ने आक्रामक शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने क्रीज पर उतरते ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए। थरंगा ने प्रवीण कुमार के तीसरे ओवर में लगातार तीन चौके जड़े, जबकि दिलशान ने जहीर खान को निशाना बनाते हुए उनके छठे ओवर में मिड ऑफ, मिड ऑन से चौका जड़ने के बाद पुल करके गेंद को सीमा रेखा तक पहुँचाया।

थरंगा ने अगले ओवर में आशीष नेहरा पर लगातार दो चौके मारे, जबकि दिलशान के बल्ले का किनारा लेकर गेंद स्लिप क्षेत्र से चार रन के लिए गई। दिलशान ने हरभजन पर सीधा छक्का भी जड़ा।

दिलशान ने मात्र 31 गेंद में नौ चौकों और एक छक्के की मदद से अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने थरंगा के साथ मिलकर 13.1 ओवर में श्रीलंका का स्कोर 100 तक तक पहुँचाया लेकिन थरंगा हरभजन के इसी ओवर में स्लिप में वीरेंद्र सहवाग को कैच देकर पैवेलियन लौट गए। दिलशान पर थरंगा के आउट होने का कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने रविंद्र जडेजा की अगली गेंद को लांग आन के उपर से छह रन के लिए भेजा।

दिलशान ने इसके बाद कप्तान कुमार संगकारा के साथ दूसरे विकेट के लिए 45 रन जोड़े। संगकारा ने दिलशान के साथ गलतफहमी का शिकार होकर रन आउट होने से पहले 22 गेंद में 21 रन बनाए। दिलशान और महेला जयवर्धने ने इसके बाद सतर्कता के साथ बल्लेबाजी की और एक-दो रन लेने को तरजीह दी।

दिलशान ने आशीष नेहरा की गेंद पर एक रन के साथ 91 गेंद में अपना पाँचवाँ शतक पूरा करने के बाद आक्रामक रूख अपनाया और इसी ओवर की अंतिम दो गेंदों पर लगातार चौके जड़े।

श्रीलंका को हालाँकि इसके बाद फिर बाउंड्री के लिए जूझना पड़ा, जिससे दिलशान और जयवर्धने पर दबाव बना। दिलशान इसी दबाव का शिकार बने और नेहरा की सीधी यार्कर को हटकर खेलने के प्रयास में बोल्ड हो गए। जहीर ने इसके बाद जयवर्धने को धोनी के हाथों कैच कराकर श्रीलंका को चौथा झटका दिया। उन्होंने अपनी 47 गेंद की पारी में सिर्फ एक चौका जड़ा।

तिलन कंदाम्बी (27) और एंजेलो मैथ्यूज ने इसके बाद पारी को आगे बढ़ाया और कुछ अच्छे शाट खेले। श्रीलंका ने 45वें ओवर में पॉवर प्ले लिया और इसका फायदा उठाने की कोशिश में कंदाम्बी जहीर की गेंद को हवा में खेल बैठे और विराट कोहली ने पीछे की ओर दौड़ते हुए बेहतरीन कैच लपका। जहीर ने इसी ओवर में यार्कर पर चामरा कपुगेदारा (02) को भी बोल्ड किया। मैथ्यूज ने इसके बाद कुछ अच्छे शाट खेले और सूरज रणदीव (05) के हरभजन के सीधे थ्रो पर रन आउट होने के बावजूद टीम को जीत दिला दी। भारत की ओर से जहीर खान ने 63 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

PTI
इससे पहले धोनी और रैना की पारियों की बदौलत भारत ने 300 रन के स्कोर को पार किया। धोनी ने दो जीवनदान का फायदा उठाते हुए 111 गेंद की अपनी पारी में दो छक्के और आठ चौके जड़े। भारत की ओर से विराट कोहली (54) और सचिन तेंडुलकर (43) ने भी उपयोगी पारियाँ खेली।

धोनी ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया, जिसे तेज गेंदबाज चनाका वेलेगेदारा ने मैच की चौथी ही गेंद पर बेहतरीन फार्म में चल रहे वीरेंद्र सहवाग (04) को विकेटकीपर संगकारा के हाथों कैच कराकर गलत साबित करने की कोशिश की।

भारत ने 19 रन के स्कोर पर गौतम गंभीर (02) का विकेट भी गँवा दिया, जो तेज रन लेने के प्रयास में गेंदबाजी छोर पर एंजेलो मैथ्यूज के सटीक थ्रो का निशाना बनकर पैवेलियन लौटे।

तेंडुलकर और कोहली ने तीसरे विकेट के लिए 62 रन जोड़कर पारी को संभालने की कोशिश की। तेंडुलकर ने संभलकर बल्लेबाजी की और 52 गेंद की अपनी पारी में उन्होंने केवल चार चौके जड़े। यह दिग्गज बल्लेबाज अजंथा मेंडिस की दो अंगुलियों से फेंकी गुगली को आगे बढ़कर खेलने के प्रयास में पूरी तरह चूक गया और संगकारा ने उनके स्टंप उखाड़ने में कोई गलती नहीं की।

तेंडुलकर के आउट होने के बाद कोहली ने कप्तान धोनी के साथ चौथे विकेट के लिए 51 रन जोड़कर एक बार फिर भारतीय पारी को संवारने की कोशिश की। पहली ही गेंद धोनी के बल्ले का किनारा लेकर चार रन के लिए गई जबकि वेलेगेदारा थर्ड मैन पर उनका मुश्किल कैच लपकने में भी नाकाम रहे। कोहली ने सिर्फ 57 गेंद में अपना तीसरा एकदिवसीय अर्धशतक पूरा किया। वह सुरज रणदीव की सीधी गेंद को चूक गए और पगबाधा हो गए। उन्होंने 65 गेंद की अपनी पारी में सात चौके जड़े। टीम इंडिया इस समय 27वें ओवर में 132 रन पर चार विकेट गँवाकर संकट में थी।

धोनी और रैना ने यहीं से पाँचवें विकेट के लिए 126 रन जोड़कर टीम का स्कोर 300 रन के पार पहुँचाया। भारतीय कप्तान उस समय भाग्यशाली रहा जब मेंडिस की गेंद पर संगकारा ने उन्हें स्टंप करने का आसान मौका गँवा दिया।

धोनी और रैना ने हालाँकि इसके बाद कोई गलती नहीं की और एक बार लय में लाने के बाद खुलकर शाट खेले। रैना ने 47वें ओवर में एंजेलो मैथ्यूज की गेंद पर मिडविकेट पर सुरंगा लकमल को कैच थमाने से पहले सिर्फ 55 गेंद की अपनी पारी में चार चौके और तीन गगनचुंबी छक्के लगाए।

धोनी ने इसके बाद सिर्फ 19 गेंद में रविंद्र जडेजा (नाबाद 12) के साथ ताबड़तोड़ 42 रन जोड़े। दाएँ हाथ का यह बल्लेबाज पारी के अंतिम ओवर में रणदीव की गेंद पर तिलकरत्ने दिलशान को कैच देकर आउट हुआ। श्रीलंका की ओर से सबसे सफल गेंदबाज रणदीव रहे। अपना पहला मैच खेल रहे इस ऑफ स्पिनर ने 51 रन देकर तीन विकेट चटकाए।

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