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15 अक्तूबर, 2009

धन्वंतरि जयंती और पूजन विधान

भगवान धन्वंतरि पूजन यानी धनतेरस इस बार 15 अक्टूबर गुरुवार को है। इस दिन त्रयोदशी 16.39 से लगेगी जो दूसरे दिन 14.32 तक रहेगी। अतः 15 को ही भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाएगा। अतः 16.55 से 18.25 तक शुभ का चौघड़िया होने से यह समय गादी बिछाने हेतु उत्तम समय है। इसके बाद शाम 18.25 से 19.58 तक अमृत है। यह समय सुख और आरोग्य के देवता धन्वंतरि पूजन हेतु उत्तम है।

धन्वंतरि‍ पूजन विधा

धन्वंतरि देवताओं के वैद्य और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं, इसलिए चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। धनतेरस के दिन चाँदी खरीदने की भी प्रथा है। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है।

भगवान धन्वंतरि जो चिकित्सा के देवता हैं, अत: उनसे सेहत और समृद्धि की कामना की जानी चाहिए। लेकिन संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है। जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है, सुखी है और वही सबसे धनवान है। संतोष रूपी धन से बड़ा कोई धन नहीं है। अत: इस दिन इसी धन की कामना करना चाहिए।

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