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04 सितंबर, 2009

संबंधों को मजबूत करेंगे भारत और रूस

भारत और रूस ने शुक्रवार को अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का निर्णय किया, जिसमें अर्थव्यवस्था तथा परमाणु एवं हाइड्रोकार्बन सहित ऊर्जा के क्षेत्र पर विशेष जोर दिया जाएगा। रूस ने दावा किया कि भारत के साथ उसके विशेष संबंध 'विशिष्ट विश्वास' से परिभाषित होते हैं।
पाँच दिनों की सरकारी यात्रा पर यहाँ आईं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की रूस के प्रधानमंत्री व्लादीमिर पुतिन के साथ उनके कार्यालय में विभिन्न मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों एवं आतंकवाद के खतरे के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार को अगले साल तक बढ़ाकर दस अरब डॉलर करने के बारे में विचार-विमर्श किया।
विदेश सचिव निरूपमा राव ने कहा कि दोनों नेताओं ने महसूस किया कि वैश्विक मंदी के दौर में आर्थिक सहयोग संबंधों का मुख्य आधार बना रहेगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में लगातार जारी वृद्धि को देखते हुए व्यापार लक्ष्य को हासिल करना व्यावहारिक है।
प्रतिभा ने संरा सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सुधार का उल्लेख किया और सुरक्षा परिषद में भारत के दावे को रूस के समर्थन की सराहना की। दोनों देशों ने सुरक्षा परिषद के सुधारों के मामले में नजदीकी संपर्क बनाए रखने पर सहमति दिखाई।
निरूपमा ने कहा कि राष्ट्रपति ने आर्थिक एवं व्यापार मुद्दों तथा उर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। पाटिल ने कहा कि पुतिन ने भारत के साथ सामरिक भागीदारी का तानाबाना तैयार किया है।
पुतिन ने कहा कि रूस का भारत के साथ किसी अन्य देश के साथ सामरिक भागीदारी नहीं है तथा विशेष संबंध विशिष्ट विश्वास से परिभाषित होते हैं। पुतिन ने कहा कि भारत के साथ संबंधों के मामले में रूस में आम सहमति और निरंतरता है।
भारत के अमेरिका के नजदीक आने संबंधी रूस में बन रही धारणाओं के बारे में पूछे जाने पर राव ने कहा कि राष्ट्रपति ने पुतिन के साथ हुई बैठक में कहा कि रूस के साथ हमारे संबंध अन्य देशों के साथ हमारे संबंधों से स्वतंत्र हैं तथा रूस के साथ भारत के रिश्ते अलग बने रहेंगे।
प्रतिभा ने दिसंबर में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की शिखर बैठक के लिए होने वाली यात्रा से पूर्व वाणिज्य, रक्षा एवं विदेश मंत्रियों की आगामी उच्च स्तरीय यात्राओं का उल्लेख किया।
राष्ट्रपति ने परमाणु ऊर्जा, रक्षा, सैन्य एवं तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में रूस के सहयोग पर संतोष जताया। उन्होंने दोनों देशों के व्यवसायियों, लोगों और युवाओं के बीच आपसी संपर्क बढ़ाए जाने पर जोर दिया।
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का आश्वासन देते हुए पुतिन ने सखालिन प्रथम में अपतटीय तेल एवं प्राकृतिक परियोजना में भारत की भागीदारी और ओएनजीसी विदेश द्वारा इंपीरियल एनर्जी आयल कंपनी के अधिग्रहण का उल्लेख किया।
उन्होंने कुडानकुलम परियोजा में हुई प्रगति तथा अतिरिक्त इकाइयों के निर्माण की चर्चा की तथा याद दिलाया कि भारत के खिलाफ परमाणु कारोबार पर लगी रोक को हटाने के लिए दोनों देशों ने किस तरह मिलकर काम किया था।
राव ने कहा कि सहयोग के इन सभी क्षेत्रों से भारत रूस भागीदारी के सही सामरिक स्वरूप का पता चलता है। पुतिन ने यह भी कहा कि भारत के अलावा रूस का किसी अन्य देश के साथ इस तरह का सहयोग नहीं है।

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