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05 सितंबर, 2009

जसवंतसिंह की किताब से पाबंदी हटी


भाजपा से निष्कासित वरिष्ठ नेता जसवंतसिंह को शुक्रवार को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। उच्च न्यायालय ने उनकी किताब 'जिन्ना : इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस' पर लगा गुजरात सरकार का प्रतिबंध हटा दिया।
अदालत ने इस आधार पर गुजरात सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया कि अधिकारियों ने जिस कानून के तहत अधिसूचना जारी की, उसमें उस कानून के प्रावधानों की जरूरतें पूरी नहीं की गई हैं।
राज्य सरकार ने सिंह की पुस्तक 'जिन्ना-इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस' पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में 19 अगस्त को सीआरपीसी की धारा 85 के तहत अधिसूचना जारी की थी। इसमें इस आधार पर पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया था कि यह ‘राष्ट्रीय हितों’ के खिलाफ है और उसकी सामग्री ‘गुमराह’ करने वाली है।
मुख्य न्यायाधीश केएस राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि प्रतिबंध आम नागरिक के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार अगर नई अधिसूचना जारी करना चाहती है तो इस पर कोई पाबंदी नहीं है।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि अधिसूचना में उन आधारों का उल्लेख नहीं किया गया है, जिसके आधार पर पुस्तक पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि अधिसूचना इस बात पर भी मौन है कि पुस्तक को पढ़ने से कैसे राज्य की शांति प्रभावित होगी।
राज्य सरकार ने पिछली सुनवाई के दौरान अदालत से अनुरोध किया था कि वह पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में नई अधिसूचना जारी करना चाहती है।
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मनीषी जानी और प्रकाश शाह ने नई अधिसूचना जारी करने के लिए समय देने की राज्य सरकार की माँग का विरोध किया था और मौजूदा अधिसूचना पर आदेश देने की माँग की थी।
पुस्तक पर प्रतिबंध के मुद्दे पर गत एक सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने सिंह की ओर से दायर याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था और मामले पर अगली सुनवाई की तारीख आठ सितंबर को निर्धारित की थी।

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