अगर आप सोच रहे हैं कि आने वाले त्यौहारों में सस्ती चीनी व दाल मिलेगी तो भूल जाइए। क्योंकि विदेश से आने वाली चीनी खुद 28 सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जो यहां 35 रुपये प्रति किलो के भाव मिलेगी। आयातित अरहर दाल भी 75 रुपये किलो से कम पर मिलने वाली नहीं है। आयात के भरोसे सरकार की महंगाई घटाने की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं।
सूखे व महंगाई से निपटने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह साफ किया है कि जिन जिंसों की कमी महसूस होगी, उसे आयात से पूरा किया जाएगा। लेकिन विश्व जिंस बाजार की तेजी से उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है। देश में मांग के मुकाबले चीनी बहुत कम है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार को कम से 50 लाख टन चीनी आयात करनी पड़ सकती है। सरकारी एजेंसियां संभावनाएं टटोल भी रही हैं, लेकिन विश्व बाजार में चीनी के भाव लगभग तीन दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। लंदन में चीनी का भाव 553 डालर प्रति टन बोला गया है। इस भाव पर आयातित चीनी यहां पहुंचकर किसी भी हाल में उपभोक्ता को 35 रुपये प्रति किलो से नीचे नहीं मिल पायेगी। यानी दीवाली महंगी विदेशी चीनी से ही मनानी पड़ सकती है।
दालों के भाव तो और भी तेज हैं। आयात के लिए सरकारी एजेंसियां चौैतरफा हाथ पांव चला रही हैं, लेकिन उचित मूल्य पर दाल कहीं भी उपलब्ध नहीं है। दरअसल, भारत को निर्यात करने वाले म्यांमार व अफ्रीकी देशों में अरहर की नई फसल जनवरी से पहले बाजार में नहीं पहुंचेगी। इससे त्यौहारी सीजन में भी अरहर दाल सस्ती दर पर उपलब्ध कराना सरकार के लिए कठिन चुनौती होगा। विश्व बाजार में अरहर 1100 डालर प्रति टन उपलब्ध है, जो यहां पहुंचकर सारे खर्च जोड़ने पर 53 हजार रुपये प्रति टन पड़ जाएगी। अरहर को दाल बनाने, अंतरराज्यीय ढुलाई, स्थानीय कर और आपूर्ति चेन में जाने पर खुदरा बाजार में इसका मूल्य 65 से 75 रुपये प्रति किलो हो जाएगा। घरेलू जिंस बाजार में आपूर्ति घटने से दालों की कीमत में आई तेजी थम नहीं रही है, खासतौर से अरहर दाल में। चना व मटर के भाव में सामान्य उतार-चढ़ाव है, लेकिन मूंग व उड़द के मूल्य अरहर के विकल्प होने के चलते चढ़ रहे हैं।
विश्व जिंस बाजार की नब्ज टटोलने वाले संजीव गर्ग को लगता है कि फौरी तौर पर महंगाई को रोक पाना संभव नहीं है। आपूर्ति घटने से आने वाले दिनों में विश्व बाजार में चीनी मूल्य में गिरावट की गुंजाइश नहीं है। ऊपर से लंदन व न्यूयार्क के जिंस बाजार में संट्टेबाजों की सक्रियता ने कोढ़ में खाज का काम किया है।
त्यौहारी सीजन व खरीफ में पड़े भीषण सूखे के चलते आयातकों ने अति सक्रियता दिखाते हुए चालू वर्ष में 80 लाख टन खाद्य तेलों का आयात कर लिया है, जो अब तक की सर्वाधिक मात्रा है। बंदरगाह पहुंच क्रूड पाम आयल [सीपीओ] 710 डालर [35 हजार 500 रुपये] प्रति टन होगा। लगभग सात रुपये प्रति किलो का खर्च जोड़कर यह 42 रुपये प्रति किलो पड़ेगा। इसलिए खाद्य तेलों के मूल्य में फिलहाल किसी भारी तेजी की संभावना नहीं है।
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