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24 अगस्त, 2009

डीएल के लिए अब देनी होगी ऑनलाइन परीक्षा

राजधानी दिल्ली में रहते हैं और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो आपको परिवहन विभाग के लाइसेंसिंग कार्यालय में खुद जाना ही होगा। अब घर बैठे ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनेगा, चाहे प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। इसके लिए आपको कंप्यूटराइज्ड परीक्षा देनी होगी। पास हुए तो ठीक अन्यथा दोबारा परीक्षा में बैठना होगा। अगर दूसरी बार भी हुए फेल तो दिल्ली में नहीं बन पाएगा आपका लर्निग लाइसेंस। क्योंकि, पूरी लाइसेंसिंग प्रणाली होने जा रही है विदेशी तर्ज पर अत्याधुनिक तकनीकों से लैस। जो आनलाइन कंप्यूटराइज्ड होगी और कंट्रोलिंग करेगा दिल्ली परिवहन हेडक्वार्टर। पहली बार परिवहन प्राधिकरण के सभी 13 जोन आनलाइन होंगे और लर्निग लाइसेंस बनवाने वाले का मौजूद होगी पूरी 'जन्मकुंडली'। इसके लिए परिवहन विभाग ने यूके वेस्ट कंपनी पियरसन से समझौता किया है। उसी तकनीक से दिल्ली में भी बनेगा लर्निंग लाइसेंस। इसके लिए विभाग ने पूरा ढांचा तैयार कर लिया है, जिसकी रिपोर्ट दिल्ली सरकार को भी दे दी है। वैसे भी परिवहन विभाग अपने इस 'पायलट प्रोजेक्ट' का खाका खींच चुका है और अगले तीन महीने के भीतर इसे अमलीजामा पहना देगा। विभाग इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए ट्रायल के रूप में वीवीआईपी जोन आईपी डिपो को चुना है, जहां से इस प्रणाली की शुरुआत होगी। इसलिए वहां इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का हुक्म भी दे दिया गया है। यहां उम्मीद है कि सितंबर में ही काम शुरू हो जाए। लाइसेंसिंग प्रणाली इंटरलिंक होने से दिल्ली वासियों को यह फायदा होगा कि वह दिल्ली के किसी भी आफिस से डीएल बनवा सकता है। उसे जहां सुविधा हो वहां से बनाने की छूट मिलेगी। इसके लिए आपको लाइन लगने या फिर दलालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

कंप्यूटराइज्ड आनलाइन व्यवस्था होने से लर्निग बनाने वाले दलालों की छुट्टी हो जाएगी। इस व्यवस्था के तहत दलालों द्वारा हेराफेरी करने की संभावना नहीं रहेगी। क्योंकि, अभ्यर्थी को खुद जाकर परीक्षा देनी होगी। पास हुए तो 'बायोमैट्रिक हस्ताक्षर' करना जरूरी होगा, जो आपके डीएल पर दर्ज होगा। इसके साथ ही डिजिटल फोटोग्राफी होगी, जो आपकी पहचान मानी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया से गुजरने के लिए आपको खुद चलकर विभाग में जाना होगा।

परीक्षा देने के लिए लेनी पड़ेगी आनलाइन अनुमति

लर्निग लाइसेंस बनवाने के लिए पहले आपको परिवहन विभाग के कंट्रोल रूम से आनलाइन अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद आप संबंधित जोन (जहां उस वक्त भीड़ नहीं होगी) में जाकर पूरा फार्म जमा करना होगा। इसके बाद लर्निग टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा। बिना अप्वाइनमेंट के किसी भी लाइसेंसिंग जोन में घुसने की अनुमति नहीं मिलेगी।

20 मिनट की परीक्षा और पूछे जाएंगे 20 सवाल

सांसद, मंत्री, नेता, नौकरशाह हों या फिर आम आदमी। आपको लर्निग लाइसेंस की कंप्यूटराइज्ड परीक्षा देनी ही पड़ेगी। मुख्य रूप में ट्रैफिक नियमों से जुड़े 20 सवालों का बैंक होगा जो 20 मिनट में उत्तर देने होंगे। 20 मिनट बाद कंप्यूटर अपने आप लॉक हो जाएगा। इसमें 12 नंबर मिला तो पास अन्यथा फेल। सवाल हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से पूछे जाएंगे। इसमें यातायात के नियम, यातायात चिन्ह, दुर्घटना में क्या करना है, वाहन दस्तावेजों से संबंधित सवाल होंगे। पहली बार फेल हो गए तो दोबारा एक सप्ताह बाद परीक्षा देने के लिए बुलाया जाएगा। इसमें कोई चालाकी नहीं कर सकते, क्योंकि एक बार कंप्युटर में आपकी जन्मकुंडली कैद हो गई तो आनलाइन हो जाएगी। अगर पता बदलकर भी लाइसेंस बनवाना चाहेंगे तो तुरंत पकड़े जाएंगे। मजेदार बात यह होगी कि जो कंप्यूटर चलाना नहीं जानते, उनके लिए हेड फोन और नोमोरिक पैड (स्पेशल उत्तर पैड) होगा।

लाइसेंसिंग प्रणाली में सुधार होगा : आयुक्त

परिवहन आयुक्त आरके वर्मा के मुताबिक इस अत्याधुनिक प्रणाली से लाइसेंसिंग प्रक्रिया में बेहद सुधार होगा। मैनुअल सिस्टम से छुट्टी मिलेगी और घूसखोर कर्मचारियों पर पूरी तरह से अंकुश लगेगा। उनके मुताबिक यह पायलट प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार रोकने में सहायक साबित होगा। इस प्रोजेक्ट में 5 करोड़ रुपये लगेंगे। बकौल, वर्मा इस प्रणाली के शुरू हो जाने से विभाग का कोई अधिकारी भी अगर चाहे तो किसी की मदद नहीं कर सकता। क्योंकि, परीक्षा रूम में कैमरे लगे होंगे, जिसकी कमांड एमएलओ या फिर मुख्यालय के पास होगी।

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