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13 अगस्त, 2009

दस लाख तक की आय पर 10% कर

वित्तमंत्री ने जारी किया कर संहिता का मसौदा
आयकर दरों को नरम बनाने और प्रतिभूति लेन-देन कर (एसटीटी) समाप्त करने जैसे प्रस्तावों सहित कर ढाँचे में आमूलचूल परिवर्तन के उद्देश्य से सरकार ने बुधवार को नई प्रत्यक्ष कर संहिता का मसौदा जारी किया। मसौदे में 10 लाख तक की आय पर 10 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है। इस पहल को देश में व्यक्तियों और कंपनियों की आय पर कर लगाने की पूरी प्रणाली में सुधार की बड़ी पहल माना जा रहा है।
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा जारी की गई इस संहिता में एक लाख 60 हजार रुपए तक की सालाना आय वाले व्यक्ति को आयकर से बिलकुल मुक्त रखने, 10 लाख रुपए तक की आय पर दस प्रतिशत की दर से तथा 10 लाख से ऊपर 25 लाख रुपए तक की आय पर 20 प्रतिशत और 25 लाख रुपए से अधिक की सालाना व्यक्तिगत आय पर 30 प्रतिशत की दर से आयकर लगाने का प्रस्ताव है।
फिलहाल एक लाख 60 हजार रुपए सालाना आय वाले को आयकर से छूट है, लेकिन एक लाख साठ हजार रुपए से तीन लाख रुपए सालाना आय वाले को 10 प्रतिशत कर देना होता है। तीन से पाँच लाख रुपए आय वाले को 20 प्रतिशत और पाँच लाख रुपए से अधिक आय वाले को 30 प्रतिशत आयकर देना पड़ता है।
मुखर्जी ने संहिता का मसौदा जारी करते हुए कहा कि प्रस्तावित नए कर ढाँचे में कर नियमों का बेहतर पालन और अधिक कर वसूली सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि संहिता पर भली-भाँति चर्चा होने के बाद संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक पेश किया जा सकता है। कर संहिता चार दशक पुराने आयकर कानून की जगह लेगी और इसके दायरे में संपत्ति कर सहित विभिन्न प्रत्यक्ष कर आएँगे।
कर संहिता में विवादास्पद प्रतिभूति लेन-देन कर को समाप्त करने का प्रस्ताव है। पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इस संहिता के लिए कार्य शुरू किया था। वित्तमंत्री ने कहा कि इस संहिता को तैयार करने में काफी कड़ी मेहनत हुई है। इसे 1961 के आयकर कानून के संदर्भ में देखा जाना उचित नहीं होगा। मुखर्जी ने कहा कि लोग स्वेच्छा से कर अदायगी करें, इसे ध्यान में रखकर यह संहिता तैयार की गई है ताकि कर ढाँचे को सरल बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस संहिता के जरिये क्षमता बढ़ाने और मौजूदा कर ढाँचे की खामियों को दूर करने का लक्ष्य है। नई संहिता कराधान के स्वीकार्य सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय प्रचलन के अनुरूप है। इससे एकीकृत कर रिपोर्टिंग प्रणाली का रास्ता तैयार होगा और हमारे युवा तथा पेशेवरों की आकांक्षाओं की पूर्ति होगी।
मुखर्जी ने कहा कि संहिता में कर प्रणाली को सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कराधान को नरम बनाने तथा कर आधार बढ़ाने के उद्देश्य से इसे पेश किया गया है।

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