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17 जुलाई, 2009

गंगा से जुड़ी है हिन्दुस्तान की संस्कृति: खेतान

हिन्दुस्तान की संस्कृति गंगा से जुड़ी है। गंगा मिट गई तो यह भी मिट जाएगी। राष्ट्रीय नदी की निर्मलता के लिए सब को संगठित होना होगा। भागलपुर जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष डा. शंभू दयाल खेतान ने शुक्रवार को गंगा महाआरती के मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि गंगा का व्यवसायीकरण किसी भी दृष्टि से अनुचित है। राष्ट्रीय अस्मिता की प्रतीक गंगा पर किसी तरह की राजनीति भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने वचन दिया कि स्वच्छ निर्मल गंगा के लिए हर संभव सहयोग करूंगा। सम्मानित अतिथि सीएस डा. प्रतिमा मोदी ने गंगा को संरक्षित करने की बात कही। उन्होंने इस राष्ट्रीय कार्य हर संभव सहयोग देने का वायदा किया। महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य जितेन्द्र ने गंगा की वैज्ञानिक विशेषता का उल्लेख करते हुए बताया कि गंगा भारत ही नहीं विश्व की आवश्यकता है। क्योंकि 21 वीं सदी में चिकित्सा एंटी बायोटिक नहीं बैक्टिरिया फास आधारित होगी और यह पूरी दुनिया में केवल गंगा में ही उपलब्ध है। पंडित अनूप शर्मा ने अतिथियों का गंगा पूजन कराया। बनारस के छात्रों की टोली ने महाआरती की। मंच से वैदिक मंत्रोच्चार नेपाल से आए हरिदत्त फुलारा एवं केशव अधिकारी ने किया। मंच पर महासभा के भागलपुर के मार्ग दर्शक कुंतल शर्मा, डा. एलडी मोदी, डा. असीम कुमार दास, डा. आरपी भगत, विहिप के विजय कुमार चौधरी, सहित आयोजन समिति के कृष्ण कुमार सिंह, विनय शर्मा अरुण यादव, संजीव झा, रामायण शरण, प्रा. डा. जी एम मिश्रा, विलास मिश्र, गिरधारी मिश्र, भावानन्द सिंह, एस के प्रोग्रामर आदि उपस्थित थे।

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