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23 अप्रैल, 2009

बहस में विकास, जाति का मुद्दा हावी

प्रत्याशियों की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद अब हार-जीत के समीकरण पर बहस छिड़ गई है। जातीय समीकरण के साथ ही प्रत्याशियों की संख्या पर भी बहस हो रही है। अधिकांश लोगों का मानना है कि हार-जीत जातीय समीकरण के आधार पर होते हैं। बिहार और यूपी में जातिगत वोटों के आधार पर ही दल टिकट बांटती है। जातिगत वोटों की संख्या को देखकर ही प्रत्याशी का चुनाव क्षेत्र तय किया जाता है। जातीय समीकरण चुनाव में निर्णायक मुद्दा बन जाता है लेकिन इस बार नये परिसीमन में चुनाव होने से बहुत से दलों का गणित गड़बड़ा रहा है। स्टेशन परिसर स्थित दुकान पर चाय की चुस्की और सिगरेट का कस लगा रहे लोग यह कह बैठते हैं कि कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिन्हें परिसीमन क्षेत्र की जानकारी नहीं है।

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