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06 अगस्त, 2012

अन्ना हज़ारे ने भंग की टीम अन्ना की कोर कमेटी

अन्ना हजारे द्वारा राजनीतिक दल के गठन के लिए संभवत: मार्ग प्रशस्त करते हुए टीम अन्ना को सोमवार को भंग कर दिया गया और तय किया गया कि वह लोकपाल के मुद्दे पर सरकार से अब कोई और बातचीत नहीं करेगी।जंतर मंतर पर अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने के तीन दिन बाद अन्ना हजारे की टीम को भंग करने का निर्णय सामने आया है। अनशन खत्म करते समय ही इस योजना की घोषणा कर दी गयी थी कि 2014 लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए एक राजनीतिक विकल्प तैयार किया जायेगा।

टीम भंग करने की घोषणा हजारे ने अपने ब्लाग में की है। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या वह फौरन किसी दल के गठन की घोषणा करेंगे हालांकि उन्होंने राजनीतिक विकल्प तैयार करने की प्रक्रिया की चर्चा की है।उन्होंने कहा, ‘‘सरकार जन लोकपाल विधेयक बनाने को तैयार नहीं है। कितने समय तक और कितनी बार हम अनशन करेंगे। अब लोगों ने हमसे अनशन छोड़ने और कोई विकल्प देने के लिए कहना शुरू कर दिया है। मैंने भी सोचा कि सरकार भ्रष्टाचार को नहीं रोकेगी॥’’ हजारे ने कहा, ‘‘हम टीम अन्ना की गतिविधियों को आज से रोक रहे हैं। टीम अन्ना का गठन जन लोकपाल की लड़ाई के लिए किया गया था। हमने सरकार के साथ कोई और बातचीत नहीं करने का निर्णय किया है। आज से कोई टीम अन्ना या टीम अन्ना कोर कमेटी नहीं रहेगी।’’

पिछले साल अप्रैल से ही टीम अन्ना हजारे के साथ सड़कों पर उतर आयी थी। हजारे ने चार बार अनिश्चितकालीन और चार बार ही एक दिन का अनशन किया था। इसके अलावा वह लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली संयुक्त समिति में शामिल हुए थे। टीम अन्ना के चुनावी राजनीति में प्रवेश के निर्णय का शुरू में कोर कमेटी के कई सदस्यों जैसे न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े, मेधा पाटकर, चन्द्रमोहन और अखिल गोगोई ने विरोध किया था।अन्ना ने कहा, ‘‘मैंने संसद में अच्छे लोगों को भेजने के लिए एक विकल्प दिया है। लेकिन मैं किसी पार्टी का हिस्सा नहीं बनूंगा और ना ही मैं चुनाव लडूंगा। जन लोकपाल बन जाने के बाद मैं वापस महाराष्ट्र चला जाउंगा और अपनी गतिविधियों में संलग्न हो जाऊंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पार्टी बनाने वाले लोगों से यह बात कह दी है। पार्टी बनने के बाद भी यह आंदोलन चलते रहना चाहिए। आंदोलन में, हमने पहले जन लोकपाल की मांग की थी और अब इस आंदोलन को जीवित रखने के लिए लोगों की मदद से अच्छे व्यक्तियों को संसद में भेजा जाना चाहिए ताकि कानून बनाना सुनिश्चित किया जा सके।’’

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