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18 फ़रवरी, 2010

बंगाल मेंआलू की बढ़ी पैदावार बनी मुसीबत

आलू की बढ़ी कीमतों से देश भले ही हलकान हो लेकिन पश्चिम बंगाल के किसानों की परेशानी इससे बिल्कुल उलट है। आलू की भारी पैदावार उनके लिए मुसीबत बन गई है। हाल यह है कि वहां कोई दो रुपये किलो में भी आलू को नहीं पूछ रहा है। जबकि देश के दूसरे शहरों में आलू अभी भी सात से दस रुपये किलो बिक रहा है।

केंद्रीय कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार ने बुधवार एक समारोह में कहा कि आलू समेत अन्य सब्जियों के भाव तेज होने से मुद्रा स्फीति की दर ऊंची है। शाम को मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता वासुदेव आचार्य के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पवार से मुलाकात की। वे पश्चिम बंगाल के आलू किसानों की दयनीय हालत बयां करने पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में चालू सीजन में आलू की पैदावार तीन गुनी बढ़कर 95 लाख टन हो गई है। जिसकी वजह से किसानों को घरेलू बाजार में उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। बंगाल सरकार ने आलू किसानों के हित में निर्यात के लिए अतिरिक्त सब्सिडी देने की मांग की है। आचार्य ने बताया कि वर्ष 2007-08 के दौरान भी आलू निर्यात के लिए केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी थी। उसी तर्ज पर चालू सीजन में भी किसानों की मदद की दरकार है।

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