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12 जनवरी, 2010

सीजेआई भी आरटीआई के दायरे में

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिया ऐतिहासिक फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) का कार्यालय, उनकी संपत्ति और उनके न्यायिक व्यवहार से जुड़ा हर पहलू सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में आता है। वे इसे सार्वजनिक करने से इनकार नहीं कर सकते।

कोर्ट ने कहा कि जिस न्यायपालिका ने खुद दूसरों के आचरण संहिता बनाई हो, उसके नुमाइंदे इस तरह अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। इससे जनता के बीच न्यायपालिका की साख गिरेगी और उसका भरोसा डिगेगा।

कोर्ट ने कहा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इस तरह खुद को अन्य न्यायाधीशों से अलग नहीं दिखा सकते। वे भी सूचना के अधिकार कानून के तहत उतने ही बाध्य हैं, जितनी दूसरी लोक संस्थाएँ।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कोर्ट ने सीजेआई केजी बालाकृष्णन द्वारा इस संबंध में की गई घोषणा को खारिज कर दिया है। कोर्ट का साफ कहना है कि सीजेआई को भी दूसरे न्यायाधीशों की तरह अपनी संपत्ति की जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत सार्वजनिक करना होगी।

उल्लेखनीय है कि प्रधान न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने पूर्व में कहा था कि उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश एक संवैधानिक पद प्राप्त व्यक्ति है। वह कोई लोकसेवक नहीं है, लिहाजा उसकी संपत्ति को सूचना के अधिकार कानून के तहत नहीं बाँधा जा सकता।

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