
उल्लेखनीय है कि इस दौरान राजद के सभी पाँच विधायक अनुपस्थित रहे। वहीं कई अन्य कारणों से कुछेक विधायक भी सदन में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके।
गौरतलब है कि झामुमो के सबसे बड़े नेता सोरेन को राज्यपाल के. शंकरनारायण ने 27 दिसंबर को सरकार बनाने का न्यौता दिया था और उनसे आठ जनवरी तक विश्वास का मत हासिल करने को कहा था। इसके बाद ही सोरेन ने तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
सोरेन को विश्वास मत जीतने में झामुमो के 18, राजग के 20 और आजसू के पाँच विधायकों के अलावा कुछेक और विधायकों का सहयोग मिला।