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04 दिसंबर, 2009

अब घर बैठे नहीं बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस

देश की राजधानी दिल्ली में आप रहते हैं और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो आपको स्टेयरिंग थामना आना ही चाहिए। अगर नहीं आता तो डीएल भी नहीं बनेगा। लिहाजा आप पहले अच्छी तरह से गाड़ी चलाना सीख लें। वह भी रजिस्टर्ड मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल से। वैसे नियम अभी भी यही है, लेकिन कहीं इस पर अमल नहीं होता। यही कारण है कि दिल्ली में सैकड़ों ऐसे लोगों के भी ड्राइविंग लाइसेंस बन गए हैं जिन्होंने आज तक स्टेयरिंग व्हील नहीं पकड़ी।

राज्य परिवहन प्राधिकरण ने अब मोटर वाहन कानून को सख्ती से लागू करने की योजना बनाई है। बहुत जल्द इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहना दिया जाएगा। उम्मीद है कि पायलट प्रोजेक्ट जनवरी में दिल्ली के सभी 13 क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों में लागू हो जाए।

सूत्रों की माने तो लर्निग लाइसेंस बनवाने के एक महीने बाद जब आप पक्का लाइसेंस बनवाने जाएंगे तो उस समय आपका प्रेक्टिकल टेस्ट होगा। अगर दुपहिया के लिए आवेदन किया है तो मोटर साइकिल चलानी होगी और अगर एलएमवी (लाइट मोटर वाहन) का डीएल बनवाना है तो चार पहिया का ट््रायल देना होगा।

टेस्ट की वीडियोग्राफी होगी। ड्राइवर के साथ अगली सीट पर इंस्पेक्टर होगा, जबकि पिछली सीट पर रिकार्डिग करने वाला। आवेदक रोड पर गाड़ी चलाने में अगर फेल होता है दोबारा उसे 7 दिन बाद बुलाया जाएगा। मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक उसे दो बार मौका मिलेगा। दूसरी बार भी अगर आवेदक फेल हो गया तो उसका लर्निग लाइसेंस भी कैंसिल हो जाएगा।

वैसे परिवहन विभाग के एक दो अथॉरिटी में वीडियोग्राफी की व्यवस्था अभी भी है, लेकिन बाकी स्थानों पर देशी स्टाइल में इम्तेहान हो रहा है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पर रहा है।

राज्य परिवहन प्राधिकरण के आयुक्त आरके वर्मा की मानें तो जनवरी से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के पूरे सिस्टम को केंद्रीकृत किया जाएगा। जिसकी कमान और निगरानी परिवहन मुख्यालय में होगी। सभी 13 अथारिटी का डाटा केंद्रीय कंट्रोल रूम (मुख्यालय) में जमा होगा। इसी तरह पक्का लाइसेंस टेस्ट की वीडियोग्राफी की मानीटरिंग मुख्यालय में बैठे उच्च स्तर के अधिकारी करेंगे।

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