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12 दिसंबर, 2009

वित्तरहित शिक्षण संस्थानों को खरमास बाद भुगतान

दो दशक पुराने कैंसर का आखिरकार नीतीश सरकार ने इलाज ढूंढ़ ही लिया है। वित्तरहित प्रस्वीकृति प्राप्त निजी माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयों एवं डिग्री कालेजों को वित्त सहित करने की जांच वाली कवायद समाप्त होने को है और यदि सब कुछ ठीक रहा तो 1280 संस्थानों को जनवरी 2010 में अनुदान मिलना शुरू हो जायेगा। अनुदान पाने का फाटक अब खुलने ही वाला है। सरकार ने इस मद में पूर्व में ही 138 करोड़ की राशि मानव संसाधन विभाग को थमा रखी है। आधिकारिक तौर पर मिली जानकारी के अनुसार अनुदान पाने की इच्छा रखने वाले 1280 स्कूलों व कालेजों में से 95 फीसदी संस्थानों के कागजात तथा उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के रिजल्ट व नये सत्र में नामांकित छात्र-छात्राओं का सत्यापन हो चुका है। मानव संसाधन विकास मंत्री हरिनारायण सिंह के अनुसार खरमास समाप्त होने ही 15 जनवरी 2010 के बाद अनुदान के लिए उचित पाये गये संस्थानों को चेक भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी। सरकार के इस फैसले से वित्तरहित संस्थानों में कार्यरत 50 हजार से अधिक शिक्षकों व शिक्षकेत्तरकर्मियों को नियमित वेतन का लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने अनुदान के लिए आवेदन देने के लिए 30 जून 2009 अंतिम तिथि मुकर्रर की थी। यह तय हुआ कि अनुदान की राशि छात्रों के माध्यमिक, उच्च माध्यमिक व डिग्री परीक्षा के रिजल्ट के परीक्षाफल के आधार पर दी जायेगी। पहला भुगतान वर्ष 2008 के परीक्षा परिणाम पर होगा तथा उसके बाद संस्थानों को हर वर्ष 30 जून तक परीक्षा परिणाम व हलफनामे के साथ अनुदान के लिए आवेदन करना होगा। फिलवक्त तो सरकार मामूली जांच के बाद अनुदान दे रही है मगर बाद में सघन जांच में यदि कागजात में दी गयी जानकारी गलत पायी गयी तो संबंधित संस्थान अनुदान से वंचित होंगे व उनसे प्रदत्त अनुदान की वसूली भी की जायेगी। मिली जानकारी के अनुसार विभाग को कुल 1280मिलेगा अनुदान वित्तरहित प्रस्वीकृति प्राप्त शिक्षण संस्थानों से आवेदन मिले हैं। इनमें 140 डिग्री कालेज, 390 इंटर कालेज तथा 750 निजी हाई स्कूल शामिल हैं। इन संस्थानों में 95 फीसदी के कागजातों की जांच हो चुकी है तथा पूर्व में अस्वीकृत शेष बची संस्थानों के कागजातों की दुबारा जांच का काम भी 17 दिसंबर तक समाप्त हो जायेगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार रिजल्ट के आधार पर संस्थानों के लिए प्राप्त अनुदान राशि से चेक प्रदान किये जाने पर बैठकें हो रही है। रिजल्ट के आधार पर संबंधित संस्थानों के कर्मियों को प्रति माह कितनी राशि प्राप्त होगी इसका भी आकलन किया जायेगा। राशि घटने की स्थिति में अतिरिक्त राशि की मांग पर भी विचार किया जा रहा है। वैसे जनवरी 2010 माह में अनुदान वितरण का काम शुरू कर दिया जायेगा। विभाग ने अनुदान के लिए जो फार्मूला तैयार किया है उसके तहत स्नातक स्तर पर प्रति सफल छात्र 8500 रुपये (प्रथम श्रेणी), 8000 रुपये (द्वितीय श्रेणी) व 7500 रुपये (तृतीय श्रेणी) की दर से प्रति वर्ष अनुदान देने का प्रस्ताव है जबकि स्कूलों व इंटर कालेजों के लिए सपाट तरीके से तीन हजार व चार हजार रुपये प्रति छात्र-छात्रा निर्धारित कर दिये गये हैं। अनुदान राशि से शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को वेतन देंगे। किसी भी परिस्थिति में इसका विचलन नहीं किया जायेगा। संबंधित विद्यालय के अनुदान के लिए अधिकतम छात्र-छात्रा की संख्या सरकार निर्धारित करेगी। वित्तरहित डिग्री कालेजों के शिक्षकों को हर वर्ष के परीक्षा परिणाम के आधार पर वेतन मिलेगा। गौरतलब है कि वित्तरहित शिक्षाकर्मियों की दो दशक से अधिक समय से लंबित मांग पर फैसला करने के लिए समय-समय पर जांच कमेटियां बनीं मगर उनके प्रतिवेदनों को लागू करने की बजाय ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा। नीतीश सरकार ने मार्च 2009 में कैबिनेट की बैठक में वित्तरहित नीति को समाप्त कर वह प्रस्वीकृति प्राप्त निजी वित्तरहित संस्थानों को परीक्षा परिणाम के आधार पर अनुदान देने का निर्णय किया, अब उसे अमली जामा पहनाया जा रहा है।

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