कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर
बिहार के भागलपुर, मधेपुरा, पूर्णिया, कोसी व सीमांचल के दियारा (डेल्टा) इलाकों में पुलिस-प्रशासन का नहीं गुंडा बैंकर्स का राज चलता है। जुर्म की काली दुनिया से निकल कर महाजन बन बैठे बदमाशों ने अवैध रूप से लोकल बैंक (गुंडा बैंक) खोल रखे हैं, जहां चार फीसदी महीने की ब्याज दर पर कर्ज मिलता है। ब्याज और मूल की वसूली के लिए कर्जदारों के शरीर से सीरिंज के जरिये खून निकाला जाता है। यातनाओं का दौर इतना भयानक होता है कि रूह कांप जाए। कई लोगों की हत्या तक हो चुकी है। थानों में अबतक तीन सौ से अधिक मामले गुंडा बैंकर्स की ज्यादतियों से संबंधित दर्ज हो चुके हैं। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के दियारा इलाके, पूर्णिया, मधेपुरा, कोसी-सीमांचल इलाकों में गुंडा बैंक खुलेआम चलाये जा रहे है। कहा जाता है कि लोकल बैंक चलाने की सोच सिकंदर नामक एक चर्चित शख्स ने अपने लोगों के सामने रखी थी। उसमें यह समझ सूबे के एक चर्चित घोटाले के पैसे आने के बाद विकसित हुई थी। घोटाले में लिप्त बड़े ओहदेदारों ने उसे बैंक चलाने के लिए एकमुश्त रकम दी। शर्त थी कि बैंक के जरिये उनके दो नंबर के पैसे ब्याज पर लगाएं। तीन रुपये सैकड़े की दर से बैंक संचालक को घोटाले का पैसा मिला था जिसे उसने चार रुपये की दर से लोगों को कर्ज बांटा। इसमें प्रत्येक माह ब्याज न देने पर ब्याज की रकम मूलधन में जुट जाती है। इसे यहां कट्ठी का नाम दिया गया है।(यह चक्रवृद्धि ब्याज की तरह है)। देखते ही देखते सरस्वती, शारदा, बीणापानी, सहारा, मां विषहरी विकास बैंक, शिवशंकर बैंक समेत सैकड़ों की संख्या में गुंडा बैंक उग आए। बैंक के संचालकों में अधिकांश की पृष्ठभूमि आपराधिक है। कर्ज और ब्याज में ना नुकुर करने का अंजाम मौत होती है। कटिहार जिले के कुर्सेला निवासी लकड़ी व्यवसायी संजय चिरानियां का अपहरण 3 जनवरी 2006 को गुंडा बैंक के रुपए न लौटाने पर किया गया था। व्यवसायी ने गुंडा बैंक से 16 लाख कर्ज लिए थे। उसकी बरामदगी पांच दिनों बाद कटिहार, पूर्णिया और भागलपुर पुलिस की संयुक्त छापेमारी में नवगछिया के तिनटंगा दियारे में अवधेश मंडल के यहां से हुई थी। इसके बाद ही गुंडा बैंक का पर्दाफाश हुआ था। अवधेश के घर से कंप्यूटर, सीडी समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। त्वरित अदालत में एक अभियुक्त कारेलाल मंडल को तीन साल की सजा हुई थी। गुंडा बैंक से कर्ज लेने के बाद न लौटाने पर भागलपुर के नारायणपुर प्रखंड स्थित जयपुर चोरहर गांव निवासी महेश चंद्र मंडल के शरीर से सीरिंज के जरिये तब तक खून निकाला गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गया।
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