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07 सितंबर, 2009

10वीं की परीक्षा में नंबर का खेल खत्म

शिक्षा क्षेत्र में एकमुश्त सुधार में जुटी सरकार ने स्कूली शिक्षा के अध्याय में नई इबारत लिख ही दी। देश भर में न सही, लेकिन सीबीएसई स्कूलों में 2011 से दसवीं बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। स्कूल पूरे साल छात्रों का 'सतत, समग्र मूल्याकंन' करेंगे। अंतत: ग्रेडिंग के आधार पर नतीजे घोषित होंगे। अगर कोई छात्र चाहे तो वह परीक्षा देने की इच्छा जाहिर कर सकता है। यानी स्कूलों में 'एक्जाम आन डिमांड' की सुविधा होगी। वैकल्पिक परीक्षा की यह व्यवस्था जहां 2011 से लागू होगी, वहीं ग्रेडिंग प्रणाली इसी साल से लागू हो जाएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को यहां केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड [सीबीएसई] के स्कूलों में 2011 से दसवीं बोर्ड परीक्षा के खात्मे का एलान कर दिया। उन्होंने साफ किया कि इस साल [शैक्षिक सत्र 2009-10] सीबीएसई स्कूलों की दसवीं के छात्रों की बोर्ड परीक्षा तो होगी, लेकिन उनके परिणाम ग्रेडिंग प्रणाली पर घोषित होंगे। जो बच्चे इस साल नौवीं कक्षा में हैं, उनकी पढ़ाई के नतीजों का निर्धारण आगामी अक्टूबर महीने से ग्रेडिंग प्रणाली पर शुरू हो जाएगा और 2011 में जब वे दसवीं में होंगे तब उन्हें बोर्ड परीक्षा देने की जरूरत नहीं रह जाएगी।

स्कूली शिक्षा में इस बदलाव के बाबत सीबीएसई के कार्यवाहक अध्यक्ष विनीत जोशी की ओर से दिए गए एक प्रजेंटेशन के बाद सिब्बल ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि दसवीं बोर्ड खत्म होने के बाद भी जो छात्र खुद को परीक्षा के जरिये आंकना चाहता है, उसके लिए आन डिमांड परीक्षा की सुविधा होगी।

इसी तरह जिस छात्र को दसवीं के बाद किसी दूसरे स्कूल में दाखिला लेना होगा, वह भी परीक्षा देकर सीबीएसई का सर्टिफिकेट हासिल कर दूसरे स्कूल में दाखिला ले सकेगा। परीक्षा की यह सुविधा स्कूल में भी होगी और इंटरनेट के जरिये आनलाइन परीक्षा भी दी जा सकेगी।

परीक्षा नहीं देने की स्थिति में स्कूल में सतत, समग्र मूल्याकंन की प्रक्रिया अमल में आएगी। यह प्रक्रिया हर साल अक्टूबर और मार्च में अपनाई जाएगी। इसमें दो तरह का मूल्याकंन होगा। एक, पाठ्यक्रम के आधार पर और दूसरा, पाठ्यक्रम से अलग क्विज, वाद-विवाद, साक्षात्कार, मौखिक व दृश्य आधारित परीक्षण, प्रोजेक्ट और प्रयोग आदि के आधार पर। मंशा छात्र की प्रतिभा का सही आकलन करना है। इसकी गुणवत्ता के लिए सीबीएसई सतत, समग्र मूल्याकंन की औचक जांच भी करेगा।

किस ग्रेड का क्या मतलब

प्रस्तावित ग्रेडिंग प्रणाली को नौ श्रेणी में बांटा गया है। 91-100 नंबर के बीच ए-1 ग्रेड है और उसका ग्रेड प्वाइंट 10.0 है। ए-1 ग्रेड को अपवाद की श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 81 से 90 अंक के बीच ए-2 ग्रेड है और उसका ग्रेड प्वाइंट 9.0 है, जो उत्कृष्ट की श्रेणी में आएगा। उसके बाद 71 से 80 अंक पर बी-1 ग्रेड [ग्रेड प्वाइंट 8.0] और वह बहुत अच्छा की श्रेणी में आएगा। 61 से 70 अंक पर बी-2 ग्रेड [ग्रेड प्वाइंट 7.0] को अच्छा श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 51 से 60 अंक पर सी-1 ग्रेड [ग्रेड प्वाइंट 6.0] होगा।

यह ग्रेड हासिल करने वाला छात्र साधारण श्रेणी में आएगा, जबकि सी-2 ग्रेड के लिए 41 से 50 अंक तय किया गया है, जिसका मतलब औसत से है। जबकि 33 से 40 अंक के लिए डी-ग्रेड होगा [ग्रेड प्वाइंट-4.0] और इसका मतलब औसत से भी कम है। 21-32 अंक पर ई-1 ग्रेड मिलेगा, जिसका मतलब छात्र में सुधार की जरूरत है, जबकि सिर्फ 20 अंक तक के लिए ई-2 ग्रेड होगा, उसका मतलब असंतोषजनक से है।

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