22 अगस्त, 2009

राष्ट्रपति के दो अंगरक्षकों को उम्रकैद

सामूहिक बलात्कार मामले में अदालत ने सुनाई सजा
दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2003 में यहाँ दिल्ली विश्वविद्यालय की 17 वर्षीय एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के मामले में राष्ट्रपति के प्रतिष्ठित प्रेसीडेंट्‍स बॉडीगार्ड (पीबीजी) के दो निलंबित सदस्यों को शनिवार को सश्रम उम्र कैद की सजा सुनाई।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसके सरवरिया ने सामूहिक बलात्कार के दोषी पाए गए हरप्रीतसिंह और सत्येंद्रसिंह को उम्रकैद की अधिकतम सजा सुनाई। अन्य अंगरक्षकों कुलदीपसिंह और मनीष कुमार को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। उन्हें सामूहिक बलात्कार के आरोप में तो छोड़ दिया गया, लेकिन लूट के लिए दोषी पाया गया।
यह घटना उस समय घटी थी, जब दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अपने साथी आशीष के साथ छह अक्टूबर 2003 को राष्ट्रपति भवन परिसर के पीछे बुद्ध जयंती पार्क में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के एक कार्यक्रम को देखने गई थी।
चारों दोषियों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ लूटपाट की। इसके बाद हरप्रीत और सत्येंद्र ने उसके साथ बलात्कार किया, वहीं अन्य दो ने आसपास नजर रखने का काम किया। इन चारों को पाँच दिन पहले इस मामले में दोषी ठहराया गया था। चारों दोषी वर्ष 2003 में गिरफ्तारी के बाद से ही न्यायिक हिरासत में हैं।
अभियोजन पक्ष ने पीड़िता और उसके साथी सहित 25 गवाहों से पूछताछ की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोषियों ने पहले छात्रा के मित्र के साथ दुर्व्यवहार किया और उसके बाद छात्रा को पार्क में एक एकांत स्थान पर ले गए और उसके साथ लूटपाट की। बाद में उनमें से दो ने उसके साथ बलात्कार किया।

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