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06 अगस्त, 2009

हिरोशिमा परमाणु बम हमला : 64 वर्ष पूरे

गुरुवार को हिरोशिमा में 6 अगस्त 1945 को परमाणु हमले में मारे गए लोगों की याद में हुए एक सादे समारोह में हिरोशिमा के मेयर तादातोशी अकीबा ने ओबामा की उस प्रतिबद्धता का स्वागत किया। उन्होंने कहा – “हम स्वयं को, विश्व की बहुसंख्या को “ओबामासंख्यक” के रूप में मानते हैं और शेष विश्व से आह्वान करते हैं कि वे 2020 तक सभी परमाणु हथियारों के खातमे में हमारा साथ दें।”
यह समारोह हिरोशिमा के उस प्रख्यात गुंबद की पृष्ठभूमि में हुआ जो परमाणु हमले में ढांचा मात्र रह गया था और जिसे जापान ने शांति-स्मारक के रूप में सुरक्षित रखा है।
समारोह में दुनिया भर के करीब 5,000 लोगों ने हिस्सा लिया, हालांकि अमेरिका की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था।
द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिकी बमवर्षक बी-29 से हिरोशिमा शहर पर परमाणु बम गिराए जाते ही ही पूरा हिरोशिमा क्षण भर में खाक हो गया था। अनुमानत: परमाणु विकिरण से उस क्षण से लेकर आने वाले कई महीनों तक लोग मरते रहे जिनकी संख्या 1,40,000 तक मानी जाती है।
इस हमले के तीन दिन बाद, 9 अगस्त 1945 को जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर अमेरिका ने प्लूटोनियम बम गिराया था जिससे करीब 80,000 लोग मारे गए थे।
जापान ने 15 अगस्त को युद्ध में समर्पण कर दिया था जिसके साथ ही द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया था। इन दो परमाणु हमलों से आने वाले कई दशकों ताक लोग मरते रहे थे। उस हमले और उसके बाद विकिरण से मरने रहने वालों की आधिकारिक संख्या 2,60,000 तक मानी जाती है।
जापान के प्रधानमंत्री तारो आसो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है, परमाणु अप्रसार के जापान के उदाहरण का शेष विश्व अनुसरण करेगा।
जापान ने परमाणु अप्रसार के तीन सिद्धांत अपनाए हुए हैं जिनके तहत जापान न तो परमाणु हथियार बनाएगा, न स्वामित्व में रखेगा, न जमा करेगा।
कुछ ही महीनों पहले जापान के क्षेत्रीय पड़ोसी देश उत्तरी कोरिया ने एक भूमिगत परमाणु परीक्षण किया था जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है।
इसी तरह का एक समारोह रविवार को नागासाकी में भी होगा।

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