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18 जुलाई, 2009

सत्तर हजार सचिव के पद महिलाओं के लिए आरक्षित

पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था के बाद अब सरकार राज्य के 70 हजार प्राथमिक-मध्य विद्यालयों के लिए नयी शिक्षा समितियों का गठन करने जा रही है। इस बार के चुनाव की खासियत यह रहेगी कि इन तमाम समितियों में सचिव के पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे। मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा तैयार नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद चुनाव का मार्ग प्रशस्त हो गया है। चुनाव की तारीख तय नहीं हुई है मगर विभागीय सूत्रों के अनुसार नवंबर-दिसंबर में ये चुनाव होंगे।

सूत्रों के अनुसार नियमावली तैयार करने के क्रम में यह सोच बनी कि प्राथमिक शिक्षा में माता व महिला शिक्षक का रोल अहम है। लिहाजा उनके अधिकाधिक प्रतिनिधित्व के लिए नये एक्ट के तहत होने वाले पहले चुनाव में सचिव के पद महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये हैं। विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष पद महिला व पुरुष दोनों के लिए खुले रखे गये हैं।

जो प्रावधान हैं उसके मुताबिक तीन वर्ष बाद विद्यालय शिक्षा समिति के अगले चुनाव में अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित किया जायेगा जबकि सचिव का पद पुरुष व महिला दोनों के लिए खुला रहेगा। विद्यालय सेवा समिति में कुल 15 पद होंगे। इनमें नौ पद विद्यालय के पोषक क्षेत्र में रहने वाले तथा वहां पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता चुनेंगे। इन नौ पदों में पांच पद महिलाओं के लिए सुरक्षित रहेंगे। समिति में संबंधित विद्यालय के हेडमास्टर, वार्ड का एक प्रतिनिधि तथा नगर पंचायत के मनोनीत एक मुखिया सदस्य होंगे। इनका चुनाव नहीं होगा। इसके अलावा भू-दाता, अवकाश प्राप्त सरकारी सेवक व एक अन्य सदस्य के तौर पर शामिल किये जायेंगे।

सूत्रों के अनुसार पंचायती व्यवस्था 2005 में आयी। उसके बाद विद्यालय सेवा समिति के लिए 2007 में विस्तृत नियमावली बनाने का निर्देश हुआ। निष्पक्ष चुनाव कराने के सरकार के आदेश के आलोक में पैक्स की तरह विद्यालय सेवा समिति का चुनाव भी 2008 में गठित चुनाव प्राधिकार के जरिये कराने का निर्णय किया गया है।

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