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03 जुलाई, 2009

कांवरियों को संभल कर चलना पड़ेगा नई राह पर

पहली बार श्रावणी मेला में आने वाले देशी-विदेशी कांवरियों को हर तरफ चकाचक सड़कें दिखेंगी। पिछली यादें लेकर आने वाले भागलपुर या मुंगेर की ओर से चलकर जब सुल्तानगंज में प्रवेश करेगे तो निश्चित तौर पर राहत की लंबी सांस लेंगे। देवघर की ओर से आने जाने वाले को भी पहले से चौड़ी और चिकनी सड़के काफी दूरी तक मिलेंगी। लेकिन तीनों कठपुलवा पुल पर घंटों जाम से इस वर्ष भी लोगों को राहत नहीं मिलेंगी। यहां की सभी सड़कें एक से डेढ़ फीट मोटी पीसीसी वाली हो गई हैं। बिल्कुल नई सड़कों पर भी नंगे पांव चलने वाले कांवरिया को कहीं-कहीं चुभन महसूस हो तो बेचारे संवेदक और अभियंता क्या करे? पहली वर्षा की बौछारों में ही सीमेंट ने छर्री को छोडना शुरू कर दिया है तो कोई क्या करे। दूसरी ओर सड़कें नई बनी हैं यह बताने कि लिए जगह-जगह कई मोड़ पर गड्ढों को छोड़ रखा गया है। बालूघाट से सीधे पुराने पेट्रोल पंप तक जाती पीडब्यलूडी की सड़क तो लाख कोशिश के बाद भी स्व. बच्चू साह की प्रसिद्ध दुकान से आगे स्टेट बैंक तक बन ही नहीं पाई है। उसी अधूरी सड़क पर नगर परिषद कार्यालय से कृष्णानंद स्कूल मोड़ तक बड़े-बड़े गड्ढे भी हैं। पार्वती मील कंपाउंड से गुजरते बाईपास के दोनों मुहाने पर मौजूद गड्ढे में संतुलन बनाना ड्राइवरों के लिए चुनौती होगी। घाट मोड़ पर ही हवलदार ज्ञानेश्वर यादव के घर के सामने नाला पर पुलिया के प्लेट भी पैरों को ठोकर मारेंगे। आगे की सड़क पर भी कांवरियों के पैरों को जख्मी करने के साथ ही जल जमाव का नजारा पेश करेगे। एन एच की जो पीसीसी सड़क बन रही है उसके भी दोनों छोरों पर भी कांवरियों को और उनके वाहनों को संभल कर ही उतरना होगा। कुल मिलाकर सड़के चकाचक तो है लेकिन यात्रियों को निरापद यात्रा के लिए संभल-संभल कर चलना पड़ेगा।

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