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19 जून, 2009

केले के रेशे से तैयार होगा कागज

केलांचल के नाम से चर्चित नवगछिया इलाके में केले की प्रचुरता को देखते हुए अब इसके औद्योगिकरण की पहल शुरू हो गई है। भले ही केले पर उद्योग लगाने की घोषणा को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है लेकिन नाबार्ड ने केले के थम से कागज बनने की संभावनाओं को तलाशते हुए इस पर आधारित कागज फैक्ट्री लगाने की पहल प्रारंभ कर दिया है। डीडीएम नवीन राय के अनुसार गंगा पार में केले के रेशे से कागज निर्माण से संबंधित कुटीर उद्योग आधारित योजना शीघ्र ही धरातल पर उतरने वाली है। श्री राय ने गुरूवार को बताया कि 29 लाख की लागत से यहां कागज फैक्ट्री स्थापित की जाएगी। यह योजना स्थानीय नवजनलोक संस्था द्वारा संचालित होगी। इन्हीं संभावनाओं को ठोस रूप देने बुधवार को नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक रामसुंदर सिंह प्रधान कार्यालय मुंबई से यहां पहुंचे। श्री सिंह कहना है कि नाबार्ड की इस स्कीम के साकार होने पर केले उत्पादकों को आम के आम गुठली के दाम की तरह दूना लाभ मिलेगा और यह पुलिस जिला फाइबर सिटी के रूप में उभर कर सामने आएगा। कागज फैक्ट्री स्थापित होने के बाद इलाके की करीब एक हजार महिलाओं को रोजगार मुहैया होगा। इतना ही नहीं बहुत संभव है कि कुछ माह बाद नवगछिया इलाके के प्रसिद्ध हरे केले की तरह केले के थम से बने फैशन युक्त हस्त निर्मित घरेलू सामान भी आपको आकर्षित करने लगे। इस इलाके में केले के रेशे से खूबसूरत चटाई निर्माण में सफलता अर्जित करने के बाद उससे आकर्षक घरेलु उपयोग के सामान निर्माण की योजना को नाबार्ड मूर्त रूप देने जा रहा है। नाबार्ड को भरोसा है कि फैंसी घरेलु उपयोग के सामानों की महानगरों की महिलाओं व अन्य जरूरतमंद लोगों के बीच खासी मांग होगी और वे इको-फ्रैंडली भी होंगे। इसे देखते नाबार्ड इसे यहां कुटीर उद्योग के रूप में स्थापित कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की अपनी दीर्घकालीन योजना को धरातल पर लाने में जुट गया है। साथ ही यहां केले के रेशे बहुतायत को देखते नाबार्ड यहां कागज निर्माण की फैक्ट्री स्थापित करने की दिशा में भी सक्रिय हो गया है। नाबार्ड के डीडीएम ने बताया कि महिला समूह द्वारा केले के रेशे से घरेलु उपयोग का फैन्सी सामान को महानगरों की मंडी का मुंह दिखाया जाएगा। प्रधान कार्यालय से राशि की स्वीकृति मिलने के बाद अक्टूबर तक इस योजना पर काम शुरू हो जाएगा। नाबार्ड की जिला इकाई द्वारा इस आशय का प्रस्ताव प्रधान कार्यालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। कच्चे माल से लेकर इसके विपणन तक की समस्या के हल के लिए नाबार्ड प्रयासरत है। डीडीएम ने बताया कि रेशे से तैयार कई सामानों के नमूने दिल्ली स्थित एक दुकान बुटिक को भेजा जा रहा है। अगर बुटिक को रेशे से बने समान पसंद आएंगे तो वह यहां समूह व ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार ऐसे सामानों को खुद खरीदेगा। डीडीएम ने बताया कि केरल में केले के थम से निकाले गये रेशे से कागज सहित अन्य फैंसी समान तैयार किया जाता है। कुछ समय पहले खादी ग्रामउद्योग के द्वारा भी आयोजित प्रशिक्षण शिविरों में केरल की महिल उद्यमियों ने नवगछिया आकर केले के थम से बनने वाले सामानों की जानकारी स्थानीय महिलाओं को दी थी।

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