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19 मई, 2009

भागलपुर में तीन को फांसी की सजा

तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश झुलानंद झा ने मो.इलियास हत्याकांड में सोमवार को तीन मुजरिमों को फांसी की सजा सुनायी है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में इस कांड को विरल से विरलतम मानते हुए भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 302/34 तथा 201 में फांसी की सजा सुनायी है। सरकार की ओर से इस मामले में अपर लोक अभियोजक मो.इरशाद नवी उर्फ हैल्मेट ने बहस में भाग लिया।

बता दें कि कोलकाता की रहने वाली एक लड़की के चक्कर में मो.इलियास की उसके दोस्तों ने गला रेत कर हत्या कर शव को एक कुएं में डाल दिया था। अपनी प्रेमिका को साथियों की बुरी नजरों से बचाने की सजा इलियास को अपने एक-एक कतरे खून से चुकानी पड़ी। हत्याकांड में अनुसंधानकर्ता की पैनी तफ्तीश से कांड का सच सामने आ गया था। मामला प्रेम-प्रसंग का निकला। घटना नाथनगर थानाक्षेत्र के कबीरपुर की थी। 22 जनवरी 2003 की संध्या से कबीरपुर निवासी मो.सम्सउद्दीन का पुत्र इलियास घर से गायब था। 24 जनवरी को सम्सउद्दीन को सूचना मिली की भूमि यादव के पुराने कुंए में उसके बेटे इलियास की लाश छत-विक्षत अवस्था में पड़ी है। सम्सउद्दीन ने पुलिस को दिये फर्द बयान में अज्ञात लोगों के विरुद्ध हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी थी। इलियास के मित्र असमद को संदेह के आधार पर जब पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में उसने पहले खुद को निर्दोष बताते हुए घटना की अनिभिज्ञता जाहिर की। बाद में पुलिसिया थर्ड डिग्री के आगे शीघ्र ही उसने हत्या का पोशिदा राज खोल दिया। अपने स्वीकारोक्ति बयान में उसने जो सनसनीखेज खुलासा किया उससे पुलिस ने धड़ाधड़ अन्य आरोपियों को दबोच लिया। इलियास ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कहा कि कोलकाता की एक लड़की के चक्कर में मो.गुलाम, मो.पिपिया, इलियास और वह आपस में दोस्त थे। उस लड़की को सामूहिक रूप में अपनाने के चक्कर में ही दोस्ती रंजिश में बदल गयी।

इस मामले में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश झुलानंद झा ने 14 मई को सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य को देखते हुए मो.गुलाब, मो.असमद और मो.पिपिया को हत्याकांड का मुजरिम करार दिया था। सजा बिंदु पर सुनवाई के लिये सोमवार का दिन तय कर रखा था।

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