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04 मई, 2009

लहठी की तरह आकर्षक नहीं है यह उद्योग

लाह पर आधारित लघु उद्योग यहाँ तेजी से फैलता जा रहा है। लाह से बनी लहठी की काफी मांग है। सुहाग के प्रतीक के रूप में यहां की लहठी महिलाओं में काफी लोकप्रिय भी है। शादी विवाह में इसका खूब उपयोग होता है। देहात की महिलाएं यहां लहठी खरीदने झुंड में आती हैं। स्थानीय मस्जिद रोड में कई जगहों पर लहठी बनाने का काम होता है। वहां उसकी लगभग एक दर्जन दुकानें हैं। लहठी दुकानदारों ने बताया कि इस वर्ष लगन के बावजूद बिक्री अन्य वर्षो की तुलना में कम हो रही है। राजस्थान से सौ वर्ष पूर्व यहां आकर बसे मनियार परिवार के लोग यह कार्य कर रहे हैं। यह उनका पुश्तैनी धंधा है। इस परिवार के नौजवान, महिलाएं , बच्चे सभी इस धंधे में शामिल हैं। लहठी बनाने वाले युवक राजू मनियार और सिकंदर मनियार कहते हैं कि लहठी में राजस्थानी संस्कृति की झलक मिलती है। शादी विवाह के मौसम में लहठी बाजार चमक उठता है। यहां की लहठी आकर्षक और सस्ती होती है। शहरी क्षेत्र के अलावे ग्रामीण इलाकों में इसकी काफी मांग है। रिश्तेदारों के माध्यम से यहां की लहठी सूबे के अन्य हिस्सों में पहुंच रही है। लहठी बनाने वालों का कहना है कि अगर इस धंधे को सरकारी सहायता मिले तो यहां का लहठी उद्योग व्यापक रूप ले सकता है। लगन में औसतन एक दुकानदार प्रतिदिन दो से तीन हजार की बिक्री कर लेता है। लेकिन इस बार लगन के बावजूद इसकी बिक्री परवान नहीं चढ़ पाई है। इस समय बमुश्किल पांच सौ रुपये की ही बिक्री हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां के लाह व लहठी उद्योग को कद्रदान के साथ - साथ सरकारी मदद की दरकार है। कच्चा माल मिलने में दिक्कत होने और उसके महंगा होने के कारण उसमें बचत कम होती है। नतीजतन लहठी बनाने वालों की आर्थिक स्थिति लहठी की तरह चमकदार नहीं हो पाई है।

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