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28 अप्रैल, 2012

सेक्स संबंध बनाने में किशोरों से बहुत आगे हैं किशोरियां

नई दिल्ली। पिछले साल यूनीसेफ ने भारत में जब सेक्स पर सर्वे किया तो कई चौंकानेवाली सच्चाई सामने आईं। सबसे बड़ी सच्चाई यह कि भारत में 15 से 19 वर्ष के बीच की उम्र की आठ फीसदी लड़कियां यौन सम्बंध बना लेती हैं। महत्वपूर्ण बात ये है कि इस उम्र के लड़कों में यह प्रतिशत केवल तीन है यानी केवल तीन फीसदी लड़के 15 से 19 साल की उम्र में सेक्स के अनुभव से रूबरू होते हैं।
वैसे ये आंकड़े केवल भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों को मुंह पर तमाचा मारते हैं। जैसे कैरिबियन और लैटिन अमेरिकी देशों सहित लगभग सभी विकासशील देशों का यही हाल है। यूनीसेफ ने 2010 में ‘बच्चों के लिए विकास’ नामक प्रोजेक्ट के तहत यह सर्वे किया था और पिछले साल से लेकर अब तक इस स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
इस सर्वे के माध्यम से यूनीसेफ यह बताना चाहता था कि कम उम्र में शादी यानी कम उम्र में ही मां बनने और कई बीमारियों को दावत, जिनमें एचआईवी सबसे अव्वल है। ये आंकड़े बताते हैं कि प्रत्येक 1000 भारतीय महिलाओं में जो मां बनती हैं, उनमें 15 से 19 वर्ष की महिलाओं की तादाद 45 थी।
भारत में सिर्फ 19 प्रतिशत लड़कियों को एचआईवी-एड्स और किसी भी तरह के सुरक्षा-साधनों की विस्तृत जानकारी है। लड़कियों के मुकाबले लड़कों के मामलों में यहां थोड़ी-सी राहत दिखाई देती है, क्योंकि 35 प्रतिशत लड़कों को एचआईवी-एड्स और किसी भी तरह के सुरक्षा-साधनों की विस्तृत जानकारी होती है। 2010 में भारत में 10 से 19 आयुवर्ग में 49 हजार लड़के और 46 हजार लड़कियां एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।

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