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22 जुलाई, 2010

हर लड़की के लिए एक आम का पेड़

धरहरा की चर्चा अब अमेरिका में
बिहार के भागलपुर जिला अंतर्गत नवगछिया अनुमंडल में एक ऐसा गाँव है जहाँ लड़की के पैदा होने पर एक आम का पेड़ लगा दिया जाता है। पेड़ से होने वाली कमाई से लड़की की शादी होती है। सबसे कम गर्भपात और दहेज हत्या वाले इस धरहरा गाँव की चर्चा अब अमेरिका में हो रही है।

बिहार के धरहरा गाँव की तारीफ करते ग्लोबल वूमन ईश्यू की एम्बेसडर मेलान वेरवीर की जुबान नहीं थकती। वो कहती हैं कि पेड़ लगाने की एक छोटी-सी पहल से लड़कियों की शादी के खर्च का बोझ माँ-बाप के सिर से हट जाता है और केवल इसी वजह से गाँव की लड़कियों की हालत सुधर रही है।

ऐसे देश में जहाँ दहेज हत्या और महिला भ्रूण हत्या के मामले गंभीर रूप ले रहे हैं, एक ऐसा गाँव भी है जहाँ पिछले कई सालों से ना तो किसी बहू को दहेज की वजह से अपनी जान देनी पड़ी ना ही किसी बेटी को माँ की कोख में ही दम तोड़ना पड़ा।

वेरवीर कहती हैं कि दुनिया के सभी देशों में ये तय कर देना चाहिए कि एक निश्चित उम्र से पहले लड़कियों की शादी नहीं होगी। इसके साथ ही शादियों का रजिस्ट्रेशन और नियम तोड़ने वालों को सजा देने का इंतजाम करना भी जरूरी है।

वेरवीर उन परिस्थितियों को भी बदलने की भी वकालत करती हैं जिनमें बच्चों की शादी कर दी जाती हैं। एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि 18 साल से पहले शादी करने वाली लड़कियों को सामान्य लड़कियों के मुकाबले दोगुना ज्यादा हिंसा और तीन गुना ज्यादा यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है। जिन इलाकों में जंग या हथियारबंद आंदोलन चल रहे हैं वहाँ भी बच्चों की हालत बेहद खराब है।

यहाँ बच्चों को गुलाम बनाना और उन्हें बेचना, जबर्दस्ती वेश्यावृत्ति और यौन शोषण की घटनाएँ आम हैं। इसके अलावा बच्चों को बेघर होने से बचाने के लिए माँ-बाप उनकी बचपन में ही शादी कर देते हैं। नतीजा बच्चे एक बार फिर ऐसे हालात में पहुँच जाते हैं जहाँ तकलीफें उनका जीना मुहाल कर देती हैं।

भारत और चीन जैसे देशों में मादा भ्रूण हत्या दुनिया में कम होती लड़कियों की संख्या के पीछे सबसे बड़ी वजह है। इसके पीछे भी वही सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारण हैं जो कम उम्र में होने वाली शादियों के पीछे हैं।

सामाजिक विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम इन्हीं कुछ वजहों से अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते। लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है, लेकिन अभी भी हालात अच्छे नहीं हैं। दुनिया के लोग धरहरा गाँव से प्रेरणा लें तो इसे बदला जा सकता है।

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