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08 फ़रवरी, 2010

मोबाइल टावरों की तय होगी किस्मत

दिल्ली में लगे अवैध मोबाइल टावरों पर कार्रवाई को लेकर सोमवार को एमसीडी की एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। बैठक में तय किया जाएगा कि विभिन्न इलाकों में अवैध रूप से लगे 900 टावरों को लेकर क्या नीति अपनाई जाए। जिससे कि कानून का पालन हो और कनेक्टिविटी भी प्रभावित न हो। बैठक में इस बात पर भी विचार होगा कि भविष्य में नए टावरों को लेकर क्या नियम बनाए जाएं।

एमसीडी की स्थायी समिति के अध्यक्ष रामकिशन सिंघल ने यह बैठक बुलाई है। बैठक में टावर नीति को तैयार करने वाली सब-कमेटी की चेयरमैन मीरा अग्रवाल, बाकी सदस्य के अलावा एडिशनल कमिश्नर , सभी जोन के डिप्टी कमिश्नर, एमसीडी के टाउन प्लानर, चीफ लॉ ऑफिसर आदि शामिल होंगे।

मालूम हो कि मोबाइल टावरों को लेकर एमसीडी कमिश्नर केएस मेहरा ने एक नीति तैयार की थी, लेकिन 14 दिसंबर को बैठक में स्थायी समिति ने उसे नहीं माना और समिति सदस्य मीरा अग्रवाल की अध्यक्षता में एक सब-कमेटी का गठन कर दिया। मीरा ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है।

सब-कमेटी की रिपोर्ट का कहना है कि रिहायशी इलाके से टावर हटाए जाएं। लेकिन उनके हटाने से अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो मोबाइल कंपनियां ट्राई से एनओसी ले आएं कि वहां टावर लगाना जरूरी है। कमिटी का सुझाव है कि टावर लगाने के लिए ली जा रही 1 लाख रुपये की एकमुश्त राशि काफी कम है। उसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए।

राजधानी में करीब 4500 मोबाइल टावर लगे हुए है। एमसीडी का कहना है कि इनमें से 2 हजार को उसने लगाने की अनुमति दे रखी है। इसके अलावा 1600 टावरों को नियमित करने का मामला विचाराधीन है। एमसीडी के अनुसार करीब 900 टावर पूरी तरह से अवैध है। इन्होंने न तो एमसीडी से कोई एनओसी लिया है और न ही कोई फीस आदि जमा की है।

मीरा अग्रवाल के अनुसार इन टावरों को हटाने से पहले उन्हे यह विकल्प दिया जाएगा कि टावर कंपनियां इन्हे नियमित कराने या जगह परिवर्तन के लिए आवेदन करेगी तो उन्हे कम से कम दो सप्ताह का समय जरूर दिया जाएगा ताकि राजधानी में कनेक्टिविटी की समस्या न खड़ी हो।

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