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08 सितंबर, 2009

आशा भोंसले : दम मारो दम...


कहते हैं कि समय का असर सभी पर होता है, लेकिन 8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा की आवाज में आज भी वहीं खनक और मोहक अंदाज मौजूद है।
आशा भोंसले एक आलराउंडर गायिका हैं। वे कैबरे साँग भी उतनी ही सहजता से गा लेती हैं, जितना कि भजन। आशा ने जब अपना करियर शुरू किया था, तब एक से एक दिग्गज गायिकाएँ मौजूद थीं। उनके घर पर ही लता जैसी महान गायिका मौजूद हैं। आशा को तब फिल्म में एकाध कमजोर गाना गाने का अवसर मिलता था। इतनी कठिन चुनौतियाँ होने के बावजूद भी आशा ने अपना एक अलग मकाम बना लिया। लता जैसे विशाल वृक्ष के नीचे रहते हुए भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई।
सफलता का राज
रियाज को आशाजी अपनी सफलता का राज मानती है। बुलंदियों के शिखर को छूने के बावजूद आज भी वे उसी लगन, अनुशासन और समर्पण के साथ रियाज करती हैं। वर्षों से चले आ रहे नियम को उन्होंने कभी भंग नहीं किया। नियम की इतनी पक्की है कि जो चीज गले के लिए हानिकारक है उसे उन्होंने खाना छोड़ दिया तो आज तक पलटकर देखा भी नहीं।
अपने अनुशासन के अलावा आशा अपनी सफलता के पीछे संगीत जगत के कई दिग्गजों को भी श्रेय देती हैं। उनके मुताबिक पहले के संगीतकारों के सान्निध्य में गाने के कारण उनमें जबरदस्त सुधार हुआ। उन्होंने आशा को गायन की कई बारीकियाँ सिखाई। कब साँस लेना, कब छोड़ना, शब्दों का सही उच्चारण, भाषा का ज्ञान जैसे पहलू आशा ने उन संगीतकारों के माध्यम से ही सीखें।
आरडी बर्मन की याद
आरडी आज भी आशा के दिल में बसे हैं। आशा का मानना है कि आरडी बर्मन को वो श्रेय नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। आज जो रिमिक्स का दौर चल रहा है उसमें से लगभग 80 प्रतिशत गीत आरडी बर्मन के ही हैं।
आशा को आज भी आरडी से अपनी पहली मुलाकात याद है। ‘अरमान’ फिल्म बन रही थी। उस दौरान एसडी बर्मन ने आशा से आरडी की मुलाकात कराते हुए कहा कि यह मेरा लड़का है। आरडी ने ज्यादा बात तो नहीं की, लेकिन एक नोट बुक आशा की ओर बढ़ाते हुए ऑटोग्राफ माँग लिए। आशा ने उस समय सोचा भी नहीं था कि एक दिन वे आरडी से शादी करेंगी।

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