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20 सितंबर, 2009

लद्दाख में होती है करोड़ों की तस्करी

भारत-चीन सीमा पर वास्तवितक नियंत्रण रेखा अब करोड़ों रुपए की तस्करी का जरिया बन गई हैं। जहाँ भारतीय कारोबारी तस्करी के जरिए करोड़ों रुपए मूल्य के रोजमर्रा के उपयोग केसामान तिब्बत में भेज कर वहाँ से चीन के फैंसी उत्पादों को भारत लाते हैं।

यह इलाका है लद्दाख के दक्षिण पश्चिम में स्थित शंगथांग, जो तस्करों के लिए स्वर्ग बन गया है। यहाँ से गेहूँ, चावल, सिगरेट, बीड़ी तथा कुकिंग तेल जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं का तस्करी होती है।

लद्दाख क्षेत्र के सैन्य तथा प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि भारतीय कारोबारी बदले में पश्मीना शाल, चीनीबर्तन, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, कंबल आदि लाते हैं।

अधिकारियों के अनुसार पिछले साल के ओलिम्पिक से पहले चीन ने शंगथांग इलाके के दूसरी ओर अपनी भूमि मेंदुमशेले में दो अस्थाई स्थल बनाए। यहाँ दोनों तरह के कारोबारी इकट्ठे होते और सामान की अदला-बदली करते।लेकिन ओलिम्पिक के दौरान तिब्बती विरोध के चलते चीन के अधिकारियों ने इस व्यवस्था को बंद कर दिया।

इसके बाद दोनों तरफ के तस्करों के लिए अदला-बदली के रूप में तस्करी का मार्ग खुल गया।

कुछ अधिकारियों का मानना है कि चीन के अधिकारी इस तस्करी को अनुमति दे रहे हैं क्योंकि उनके लिए मुख्यचीन से पश्चिमी तिब्बत में आवश्यक वस्तुओं की समुचित आपूर्ति बनाए रखना कठिन है।

सूत्रों का कहना है कि हालाँकि भारत तिब्बत सीमा पुलिस तथा सेना इन तस्करों पर काबू करने की कोशिश कररही है लेकिन बड़ी संख्या में पहाड़ी दर्रों के चलते इस पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।

कुछ अन्य अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों परनियंत्रण कड़ा करने पर लद्दाखी राजनीतिक हस्तक्षेप होता है।
स्थानीय स्तर पर इस तरह के कारोबार की अनुमति का आग्रह किया जाता है क्योंकि अनेक लोगों की आजीविका इससे चल रही है।

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