भारतीय राजनीति के इतिहास पर अगर नजर डालें तो संजय गाँधी, राजेश पायलट, माधवराव सिंधिया, जीएमसी बालयोगी, ओपी जिंदल, साहिबसिंह वर्मा और सुरेंद्रसिंह जैसे कई प्रतिभाशाली राजनेता दुर्घटनाओं में काल के गाल में समा गए।
इसी कड़ी में इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, ललितनारायण मिश्र, दीनदयाल उपाध्याय का नाम भी आता है, जिनकी आतंकवादी हिंसा या रहस्यमय स्थिति में मौत हुई।
दुर्घटना का शिकार होने वाले नेताओं में महत्वपूर्ण नाम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के पुत्र एवं कांग्रेस नेता संजय गाँधी का है, जिनकी 29 वर्ष पहले दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी।
कांग्रेस के प्रतिभाशाली नेता राजेश पायलट भी इसी तरह मौत की नींद सो गए, जिनकी 11 जून 2000 को जयपुर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
पेशे से पायलट राजेश ने अपने मित्र राजीव गाँधी की प्रेरणा से राजनीति में कदम रखा और राजस्थान के दौसा लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। पायलट एक महत्वपूर्ण गुर्जर नेता के रूप में उभरकर सामने आए। उनके नरसिंहराव सरकार में गृह राज्यमंत्री रहते हुए तांत्रिक चंद्रास्वामी को जेल भेजा गया था।
माधवराव सिंधिया एक और महत्वपूर्ण नाम हैं, जो असमय दुर्घटना का शिकार हुए। सिंधिया ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1971 में की थी, जब उन्होंने जनसंघ के सहयोग से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में गुना लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में जीत दर्ज की थी। बहरहाल, 1997 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए। 1984 में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता अटलबिहारी वाजपेयी को ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से पराजित किया।
सिंधिया ने विभिन्न सरकारों में रेलमंत्री, नागर विमानन मंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री का दायित्व संभाला, लेकिन 30 सितंबर 2001 को विमान दुर्घटना में उनकी असमय मौत हो गई।
तेदेपा नेता जीएमसी बालयोगी भी असमय दुर्घटना का शिकार हुए, जब तीन मार्च 2002 को आंध्रप्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के कैकालूर इलाके में उनका हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
बालयोगी सबसे पहले 10वीं लोकसभा में तेदेपा के टिकट पर चुनकर आए। उन्हें 12वीं और 13वीं लोकसभा का अध्यक्ष चुना गया।
उद्योगपति तथा राजनेता ओपी जिंदल भी दुर्घटना का शिकार होने से असमय भारतीय राजनीति के पटल से ओझल हो गए। जिंदल आर्गनाइजेशन को उद्योग जगत की बुलंदियों पर पहुँचाने वाले ओपी जिंदल हरियाणा के हिसार क्षेत्र से तीन बार विधानसभा के लिए चुने गए और उन्होंने प्रदेश के ऊर्जामंत्री का दायित्व भी संभाला। 31 मार्च 2005 को हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनकी असमय मौत हो गई।
भाजपा के प्रतिभावान नेता साहिबसिंह वर्मा का नाम भी इसी कड़ी में आता है। वर्ष 1996 से 1998 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले वर्मा 1999 से 2004 तक लोकसभा के सदस्य और केन्द्रीय मंत्री भी रहे। भाजपा के उपाध्यक्ष पद का दायित्व संभालने वाले साहिबसिंह वर्मा की 30 जून 2007 को अलवर-दिल्ली राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई।
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गाँधी की अपने ही सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी भी आतंकवादी हमले का शिकार हुए, जब श्रीपैरम्बदूर में चुनावी सभा के दौरान लिट्टे आतंकवादियों ने उनकी हत्या कर दी।
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