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25 अगस्त, 2009

सीबीएसई स्कूलों में ग्रेडिंग प्रणाली

अब स्कूली छात्रों को परीक्षा में पास-फेल होने तथा सहपाठी से कम नंबर आने पर तनाव और हीनभावना का शिकार होने की जरूरत नहीं। ऐन परीक्षा के दिन बच्चा बीमार भी हो जाए,तो मां-बाप को चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि अगले दिनों में परीक्षा देने की छूट होगी। केंद्र सीबीएसई के स्कूलों में अगले साल से नंबर के बजाय ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सीबीएसई के स्कूलों में कक्षा नौ से 12 के छात्रों के लिए एक सतत समग्र मूल्याकंन व्यवस्था होगी। इसके तहत समय-समय पर उनकी विषयगत और विकास संबंधी गतिविधियों की परीक्षा होगी। टेस्ट सीट पर शिक्षक उन्हें नंबर तो देगा, लेकिन पूरी कक्षा के परिणाम ग्रेडिंग प्रणाली के तहत घोषित होंगे। मसलन, नब्बे से सौ के बीच ए-1, 80 से 89 के बीच ए-2 ग्रेड हो सकता है। 33 फीसदी से कम नंबर पाने वालों के लिए सबसे नीचे ई ग्रेड होगा। एक विषय में ई मिलने वाले को अगली कक्षा के लिए पास कर दिया जाएगा, लेकिन दो विषयों में ई ग्रेड होने पर अनुपूरक परीक्षा (कंपार्टमेंटल) देनी होगी। बताते हैं कि इसके पीछे दसवीं की बोर्ड परीक्षा वैकल्पिक बनाने की मंशा भी छिपी हुई है। यदि कोई छात्र दसवीं के बाद उसी स्कूल में करना चाहेगा तो उसके लिए दसवीं की बोर्ड परीक्षा वैकल्पिक होगी। जो बोर्ड परीक्षा में नहीं बैठेंगे,उन्हें ग्रेडिंग के जरिए अगली कक्षा के लिए पास कर दिया जाएगा। कपिल सिब्बल ने सोमवार को देशभर के शिक्षा बोर्डो की परिषद (कोब्से) की बैठक में कहा, प्रणाली अमल में आने पर 98 या 99 फीसदी नंबर पाने वाले बच्चों में कोई फर्क नहीं जाएगा। दसवीं की परीक्षा वैकल्पिक होने पर शिक्षा को नया आयाम मिलेगा। सिब्बल ने कहा, सरकार की मंशा देशभर के स्कूलों में गणित, विज्ञान व कॉमर्स की पढ़ाई के लिए एक समान पाठ्यचर्या लागू करने की है। ऐसा हुआ तो डिग्री स्तर पर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा औरबेहतर गुणवत्ता का रास्ता भी खुल सकता है।

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