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27 अगस्त, 2009

दिल्ली का लाल किला हमारा : सुल्ताना बेगम

आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के पोते मिर्जा जमशेद बुखत के बेटे मिर्जा मोहम्मद बेदार बुखत की बीवी सुल्ताना बेगम ने लाल किले पर अपना हक जताया है। उन्होंने ऐलान किया है कि इसे हासिल करने के लिए वे ईद के बाद हुमायूं के मकबरे पर बेमियादी धरना शुरू करेंगी। वे देश भर के मुस्लिम तुर्को को एक मंच पर लाने की भी ख्वाहिश रखती हैं। उन्होंने कहा है कि उनके साथ धरने में देश भर से खासी संख्या में तुर्क भी शामिल होंगे। लखनऊ में पहली जनवरी 1950 को जन्मी सुल्ताना बेगम कहती हैं कि 15 अगस्त 1965 को उनका निकाह मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के पौत्र मिर्जा जमशेद बुखत के बेटे मिर्जा मोहम्मद बेदार बुखत से कोलकाता में हुआ। उनके शौहर का इंतकाल 22 मई 1980 को हो गया था। इसके बाद उन्होंने जिंदगी का मकसद बदल लिया। मुगल बादशाह तुर्क बिरादरी से थे। मुगल शासन तक हिंदुस्तान में तुर्को की आर्थिक व सामाजिक स्थिति बेहतर थी। आजादी के बाद तुर्को की स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

उन्हें आखिरी मुगल बादशाह के देश भर में फैले विभिन्न मकबरों व अन्य संपत्ति पर भी उन्हें हक चाहिए। केंद्र सरकार की 400 रुपये प्रति माह मिलने वाली पेंशन को उन्होंने नाकाफी बताया और कहा कि इस पैसे से पेट नहीं भरता फिर भी यह उनका हक है और इसका इस्तेमाल वे उस खोए हक को पाने के लिए कर रही हैं, जिस पर केंद्र व प्रदेश सरकारें मौज कर रही हैं।

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