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28 अगस्त, 2009

30 हस्तियों की एक्स श्रेणी की सुरक्षा हटाई


पाँच वर्षों के असमंजस के बाद गृह मंत्रालय ने 30 वीआईपी से एक्स श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है, जिसमें भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश वाईएस सभरवाल भी शामिल हैं।
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने यह निर्णय किया क्योंकि उनका मानना है कि सुरक्षा सिर्फ उन्हीं लोगों को दी जानी चाहिए, जिन्हें वास्तव में खतरा है या जो संवैधानिक पदों पर हैं। खुद गृहमंत्री ने भी कोई सुरक्षा लेने से मना कर दिया है।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इसके साथ ही एक्स श्रेणी की सुरक्षा वाले लोगों की संख्या 20 हो गई है। एक्स श्रेणी सुरक्षा प्राप्त लोगों को एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी आठ घंटे के लिए मिलता है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद वाई, जेड और जेड प्लस श्रेणियों के लिए भी ऐसा किया जाएगा। जैसे ही एक्स श्रेणी से लोगों से सुरक्षा वापस लेने की खबर फैली वैसे ही पुलिस सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय में वीआईपी लोगों के आग्रह भरे काफी कॉल आने लगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के वीआईपी और अधिकतर राजनेता गृह मंत्रालय के समक्ष अपनी सुरक्षा की आवश्यकता को सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं।
बैठक में महसूस किया गया कि पूर्व मंत्रियों शिवराज पाटिल, रामविलास पासवान और जगमोहन की सुरक्षा को कम किया जाए, जबकि पूर्व विदेश मंत्री नटवरसिंह से सुरक्षा पूरी तरह वापस ले ली जाए।
गृह मंत्रालय द्वारा आहूत उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती, पूर्व केंद्रीय मंत्री लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायमसिंह यादव और भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी सहित कुछ वीआईपी से एनएसजी सुरक्षा वापस लेने की अनुशंसा की गई लेकिन अंतिम निर्णय चिदंबरम को करना है।
बहरहाल राजनीतिक दलों ने इसका जोरदार विरोध किया और सरकार ने लोकसभा में कहा कि वीआईपी लोगों से सुरक्षा वापस लेने के लिए जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं किया जाएगा।
बैठक के दौरान केंद्र सरकार से सुरक्षा प्राप्त करीब दो सौ वीआईपी लोगों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा की गई। इन वीआईपी की सुरक्षा या तो एनसजी करती है या अन्य अर्धसैनिक बलों के जवान करते हैं।
सूत्रों ने कहा कि बैठक में अनुशंसा की गई कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद और आतंकवाद विरोधी फोरम के नेता एमएस बिट्टा की एनएसजी सुरक्षा को बरकरार रखा जाए।
उन्होंने कहा कि वीआईपी सुरक्षा के कारण खर्च वहन करना भी मंत्रालय पर वित्तीय बोझ है।

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