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26 जुलाई, 2009

गलत विवरण देने पर हटाए भी जा सकते हैं न्‍यायाधीश

चीफ जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन ने कहा कि है कि न्यायाधीशों द्वारा संपत्तियों का ब्योरा देने में नाकामी या गलत विवरण पेश किया जाना ‘दुराचरण’ के बराबर होगा, जो उन्हें हटाने का आधार हो सकता है.
पहल से जगी उम्‍मीद
न्यायाधीशों के लिए अतिथिगृह का उद्‍घाटन करने आए बालाकृष्‍णन ने कहा कि संपत्ति के बारे में गलत विवरण की घोषणा न्यायाधीश को हटाने का आधार हो सकता है. प्रस्तावित न्यायाधीश सम्पत्ति विधेयक के बारे में जवाब देते हुए न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि हम पहले ही यह कर रहे हैं. न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उस समय सम्पत्तियों की घोषणा करते हैं, जब वे न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं. उन्‍होंने कहा कि हम इसे कानून बनाना चाहते हैं.
घोषणा अनिवार्य करने का प्रावधान
प्रस्तावित विधेयक में उच्च न्यायपालिका के न्यायाधीशों के लिए सम्पत्तियों की घोषणा अनिवार्य बनाने का प्रावधान है. उन्होंने विस्तार में गए बिना कहा कि ये सूचना के अधिकार के प्रावधानों के अधीन नहीं है. हम नहीं चाहते कि न्यायाधीशों को परेशान किया जाए. प्रस्तावित विधेयक के तहत उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को अपनी सम्पत्तियों की घोषणा प्रधान न्यायाधीश के समक्ष करनी होगी.

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