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02 जून, 2009

कटाव पीड़ितों को नहीं मिला सरकारी आश्रय

नवगछिया अनुमंडल के तीन प्रखंडों में गंगा व कोसी के कटाव पीड़ित अभी भी पुनर्वास की बाट जोह रहे हैं। इनको साल भर के बाद भी ढंग से बसाया नहीं जा सका है।

साल भर पूर्व कटाव के कारण तीन प्रखंडों की करीब एक हजार की आबादी प्रभावित हुई थी जो आज भी प्रशासनिक सहायता के लिए दर-दर भटक रही है। उधर, गंगा व कोसी ने जो भूमि को लील लिया है उसका सर्वे करने के लिए गत दिनों दिल्ली की टीम नवगछिया अनुमंडल के विभिन्न अंचलों में गयी थी। टीम ने गंगा व कोसी को देखकर नया नक्सा भी बनाया। सर्वे कर जाने के बाद टीम की रिपोर्ट नहीं आयी है। खरीक बीडीओ ने बताया कि वर्ष 08-09 में कटाव से पीड़ित करीब 221 परिवारों का पुनर्वास हुआ है। शेष को जमीन देने के लिए छानबीन चल रही है। खाली जमीन नहीं मिल रहा है। उधर, नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारी कपिलदेव मेहता ने कहा कि कटाव पीड़ित कुछ परिवार कहलगांव प्रखंड में बस गए हैं। कुछ परिवार जीरोमाइल के पास अघोषित रूप से बसे हैं। एसडीओ ने कहा कि ऐसे परिवार प्रशासनिक सहयोग से ही अन्य जगह बसे हैं। वैसे एसडीओ ने कहा कि काजीकोरैया, सैदपुर, कमलाकुंड में बचाव कार्य चल रहा है। जो लोग गंगा व कोसी किनारे के रहने वाले हैं वे दूर नहीं जाना चाहते। एसडीओ ने माना कि इनलोगों को चार डिसमिल जमीन मिलना चाहिए। गोपालपुर के बीडीओ ने बताया कि जो जमीन गंगा व कोसी में चली गयी उसकी नापी नहीं हो सकती। उनके प्रखंड में ऐसा कोई क्लेम भी नहीं आया है। जहां तक घर-द्वार कटने की बात है तो ऐसे लोगों की संख्या करीब 630 है। बीडीओ ने बताया कि करीब 80 प्रतिशत लोग डुमरिया, डिमहा पेट्रोल पंप के पास तथा एनएच की खाली जमीन में बस गए हैं। शेष 20 प्रतिशत के लिए जमीन चाहिए। इसके लिए समृद्ध किसानों से जमीन मांगने की बात उन्होंने कही। बीडीओ के साथ एसडीओ ने भी कहा कि बसने लायक सरकारी जमीन की खोज हो रही है।

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